लेट फाइलिंग को मिलेगा बढ़ावा GST फॉर्म टलने से!

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गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) में सुधार और सहूलियत के नाम पर कई प्रक्रियाओं को टालते जाने से अब आशंका जताई जा रही है कि इससे लेट फाइलिंग कल्चर को बढ़ावा मिलेगा और कंप्लायंस में जुटे कारोबारियों का मनोबल गिरेगा। 2 करोड़ तक टर्नओवर वालों के लिए सालाना रिटर्न (GSTR-9) दो वित्त वर्ष के लिए ऑप्शनल किए जाने के बाद जहां इसकी फाइलिंग निल होने के आसार बढ़ गए हैं, वहीं अक्टूबर से नए रिटर्न सिस्टम की तैयारियों पर खर्च करती आ रहीं फर्मों को झटका लगा है।

सालाना रिटर्न के तीन फॉर्म GSTR-9, GSTR-9A और GSTR-9C भरे जाने थे। काउंसिल ने कंपोजिशन डीलर्स (GSTR-9A) को वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए इससे पूरी तरह मुक्त कर दिया है, जबकि सामान्य डीलर्स को 2 करोड़ तक टर्नओवर पर भरें या न भरें कि छूट दे रखी है। 2 करोड़ से ऊपर ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य होने से GSTR-9C सबको भरना है।

वित्त मंत्रालय की ओर से 25 जून को जारी जीएसटी ऑडिट प्लॉन के तहत सभी राज्यों और कमिश्नरेट में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं और कई जगह रिटर्न और एनुअल रिटर्न भर चुके कारोबारियों को जांच के नोटिस भी मिल रहे हैं। जीएसटी कंसल्टेंट राकेश गुप्ता ने बताया, ‘सरकारी सर्कुलर में कहा गया है कि ऑडिट जांच उन्हीं लोगों की होगी, जिन्होंने ऐनुअल रिटर्न भर दिया है। चूंकि ऑडिट प्लान वापस नहीं लिया गया है, अब कोई कारोबारी ऑप्शनल GSTR-9 भरकर ऑडिट या जांच के झंझट में क्यों फंसेगा? इसे शायद ही कोई भरे, क्योंकि गलतियां होने की आशंका ज्यादा हैं।’ इसके पहले जॉब वर्क का फॉर्म ITC-4 भी आखिरी समय में खत्म किया गया था। अब अनुशासित तरीके से कंप्लायंस करने वाले भी अपने टैक्स प्रफेशनल्स पर दबाव बनाएंगे कि जल्दबाजी में फाइलिंग न करें और इंतजार करें।

सीए राकेश भंडुला के मुताबिक 1 अक्टूबर से आ रहे नए रिटर्न्स फॉर्म और सिस्टम की तैयारी में हजारों कंपनियों और डीलर्स ने वक्त और पैसा लगाया है। अब यह फॉर्म बिना किसी सुगबुगाहट के छह महीने के लिए आगे खिसका दिया गया। ऐसे में ईमानदारी से अनुपालन करने वाले हतोत्साहित होंगे। एक तरह से सरकार जाने-अनजाने में लास्ट आवर फाइलिंग को बढ़ावा दे रही है, जो आगे चलकर पूरे सिस्टम के लिए घातक होगा। इनकम टैक्स ऑडिट फाइलिंग की आखिरी डेट 30 सितंबर है और नए जीएसटी रिटर्न की तैयारी में लगे कारोबारियों की शिकायत है कि उन्हें पहले से पता होता तो वे नए रिटर्न में समय न गंवाकर आईटी ऑडिट की फाइलिंग पर फोकस करते। इसके लिए अब दस दिन से भी कम समय बचा है।

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