डेस्क। देश के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को देश के लोगों से कहा कि वे अपनी औपनिवेशिक मानसिकता त्याग कर के, अपनी पहचान पर गर्व करना सीखें।
आगे नायडू ने कहा, हम पर शिक्षा का भगवाकरण करने का आरोप है, लेकिन भगवा में गलत क्या है? आगे अपनी इस बात के सपोर्ट में उन्होंने कहा सर्वे भवन्तु सुखिनः और वसुधैव कुटुम्बकम जो हमारे प्राचीन ग्रंथों में निहित दर्शन हैं, आज भी भारत की विदेश नीति के लिए यही देश का मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। वे गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के देव संस्कृति विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई देश शांति एवं सुलह संस्थान का उद्घाटन करने के बाद एक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए जिसमें उन्होंने ये बाते बोली। इसके बाद नायडू ने कहा, सदियों के औपनिवेशिक शासन ने हमें खुद को एक निम्न जाति के रूप में देखना सिखाया। हमें अपनी संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान का तिरस्कार करना सिखाया गया। इसने एक राष्ट्र के रूप में हमारे विकास को धीमा भी कर दिया। शिक्षा के माध्यम से रूप में एक विदेशी भाषा को लागू करने से शिक्षा सीमित हो गई। आगे वो बोले समाज का एक छोटा वर्ग शिक्षा के अधिकार से एक बड़ी आबादी को वंचित कर रहा है।
Leave a Reply