लखनऊ. 1990 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने एक रथयात्रा निकाली थी। मकसद था, अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण। तब से लेकर अब तक कई और रथ यात्राएं निकल चुकी हैं। लेकिन, राममंदिर का संकल्प पूरा नहीं हो पाया। रामलला टेंट में हैं। और राममंदिर निर्माण के लिए उच्चतम न्यायालय में सुनवाई फिर से शुरू होने वाली है। इस बीच एक और रथयात्रा निकलने जा रही है। नाम है राम राज्य रथ यात्रा। इस रथ यात्रा को उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 13 फरवरी को अयोध्या से रवाना करेंगे। यात्रा देश के छह राज्यों से निकलेगी। 39 दिनों तक राम राज्य रथ यात्रा जगह-जगह घूमेगी। इस दौरान 40 प्रमुख सभाएं भी होगीं। इन सभाओं के लिए संबंधित राज्य सरकारों ने अनुमति दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्यों को ताकीद कर दिया है कि वे राम राज्य रथ यात्रा की सुरक्षा का इंतजाम करें। कुल मिलाकर 2018 के आम चुनावों में राम मंदिर निर्माण को भाजपा प्रमुख मुद्दा बनाना चाहती है। यह सब इसी कवायद का एक हिस्सा है।
रामदास मिशन यूनिवर्सिल सोसाइटी निकाल रहा है यात्रा
महाराष्ट्र की एक संस्था है रामदास मिशन यूनिवर्सिल सोसाइटी। यूं तो इसका नाम और काम अभी तक महाराष्ट्र तक ही सीमित है। लेकिन जल्द ही यह अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर छा जाएगी। माना जा रहा है कि इस संस्था को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वरदहस्त प्राप्त है। यही संस्था राम राज्य रथ यात्रा की प्रमुख आयोजक है। इस सोसाइटी के कामों को आगे बढ़ाएंगे राष्ट्रीय स्वंय संघ और उनके अनुषंगी संगठन। अयोध्या में एक जगह है कारसेवक पुरम। यहां रामलला मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर तरासे जा रहे हैं। बड़ी कार्यशाला है यह। यह कार्यशाला विहिप की है। इस कार्यालय की स्थापना 1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान हुई थी। तब से यहां पर कारसेवक मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने का काम कर रहे हैं। इसी जगह से राम राज्य रथ यात्रा निकलेगी। इसलिए हाल ही में कार्यशाला की सफाई और रंगाई पुताई भी की गयी है।
कारसेवक पुरम से रामेश्वर तक रामराज्य रथयात्रा
कुछ माह पहले अयोध्या से रामेश्वरम तक एक रेलगाड़ी की शुरुआत की गयी थी। तब तक किसी को यह भान नहीं था कि भाजपा इस रेलगाड़ी को किसी गुप्त एजेंडे के तहत चलवा रही है। हालांकि तबसे यही कहा जा रहा है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन, अब यह तय हो गया है कि इस यात्रा का मकसद भी राममंदिर के मुद्दे को फिर से गरमाना था। अब इसी कारसेवक पुरम से रामेश्वर तक रामराज्य रथयात्रा निकलेगी। 13 फरवरी से 39 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा देश के छह प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगी और इस दौरान 40 सभाएं होंगी। रामेश्वरम में यह यात्रा 23 मार्च तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विश्व हिंदू परिषद के अयोध्या स्थित कारसेवकपुरम मुख्यालय से रामराज्य रथयात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे। 13 फरवरी को यह रथ यात्रा यहां से चलकर मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु सहित छह राज्यों से होकर गुजरेगी।
सरयू के तट से राम का होगा जयघोष
जिन रास्तों से रामराज्य रथ यात्रा निकलेगी वहां जनसभाएं की जाएगीं। इस दौरान रामराज्य की स्थापना और राम मंदिर निर्माण का लोगों से संकल्प कराया जाएगा। कुल मिलाकर राम नाम का जाप होगा और राममंदिर का संकल्प दोहराया जाएगा। यात्रा के उद्देश्यों के बारे में पर्चे पर राम राज्य की पुनस्र्थापना, शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में रामायण शामिल करने और राम जन्मभूमि में राम मंदिर निर्माण के संकल्प की बात कही गई है। नव्य अयोध्या योजना के बाद एक बार फिर सरयू के तट से राम का जयघोष होगा। यात्रा वहां तक जाएगी जिन रास्तों से राम वनगमन के समय गए थे। राम राज्य रथ यात्रा को लेकर केंद्र सरकार भी काफी गंभीर है। गृहमंत्रालय ने जिन राज्यों से रथ यात्रा निकलेगी उन राज्यों के पुलिस प्रमुखों को पत्र जारी कर यात्रा को सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस यात्रा के लिए बंट रहे पर्चे में नेतृत्वकर्ता के तौर पर स्वामी कृष्णानंद सरस्वती और शक्ति शांतानंद महर्षि का नाम दर्ज है।
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