भारत: अंग्रेजों की बेड़ियों से आजाद हुए भारत को दो खेमों में बाटने की अंग्रेजो की नीति तब सफल हो गई जब आजादी से पूर्व भारत से अलग होकर पाकिस्तान का निर्माण हुआ। पाकिस्तान और भारत दोनो ही देश उस समय अपने अपने विकास में लगे हुए थे। लेकिन इन दोनों देशों में एक स्वतंत्रता सेनानी ऐसा था जिसका सम्मान ह्रदय से होता था और आज भी होता है।
भगत सिंह जो की 23 साल की उम्र में देश के लिये शहीद हो गए। उनका जन्म पंजाब में हुआ था। आज भारत और पाकिस्तान के बीच सम्बंध उतने अच्छे नही है दोनो देश एक दूसरे के दुश्मन बन बैठे हैं। लेकिन दोनो ही देश भगत सिंह की यादों को सजो कर रखे हुए हैं। दोनो ही देशो में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है और दोनो है देश उनका बहुत सम्मान करते हैं।
वही अगर आप इस समय पाकिस्तान जाते हैं और भगत सिंह का सम्मान देखना चाहते हैं तो आपको पाकिस्तान के बंग गांव में जाना होगा। जब आप इस गांव की।मुख्य सड़क पर पहुंचते ही एक बोर्ड दिखाई देता है, जिसपर तीन भाषाओं- पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी में लिखा है, ‘हवेली सरदार भगत सिंह.’ हवेली के दो कमरे हैं, जिन्हें पूरी तरह एक संग्राहलय का रूप दिया जा चुका है. इन्हीं कमरों में 27 सितंबर 1907 की रोज महान क्रांतिकारी की किलकारी गूंजी थी, जिसके इंकलाब के उद्घोष से बाद में ब्रितानी हुकूमत हिल गई थी।
इस गांव के लोग आज खुद पर गर्व महसूस करते हैं कि यह गांव वह है जहाँ आजादी का सबसे बड़ा दीवाना पैदा हुआ था। इस गांव में अब कोई सिख या हिंदू नहीं रहता है, लेकिन इस हवेली को फोटो गैलरी में तब्दील करते हुए राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जा चुका है. 1947 में विभाजन के बाद भगत सिंह की ये हवेली चौधरी फजल कादिर विर्क को सौंप दी गई थी और अब इसमें उनके परिवार के लोग रहते हैं।
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