लखनऊ। लगता है भाजपा सरकार जनता को बड़े बड़े ख्वाब दिखाकर लूटने पर अमादा है। अब उसने गुपचुप तरीके से बिजली की कई सेवाओं में जीएसटी लगाकर जनता को चुना लगाने का काम किया है। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा अनेकों सेवाओं में गुपचुप तरीके से 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलने की भनक लगते ही उपभोक्ता परिषद ने घेराबन्दी शुरू कर दी। जब उपभोक्ता परिषद ने निचले स्तर पर तहकीकात की तो पता चला कि उपभोक्ताओं के नये कनेक्शन के स्टीमेट पर 18 प्रतिशत, बकाया पर कनेक्शन कटने व जोड़ने पर 18 प्रतिशत एवं नया कनेक्शन लेते वक्त प्रोसेसिंग फीस पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी वसूली जा रही है। पूरे मामले को लेकर उ.प्र.राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने सचिवालय में ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से मुलाकात कर उनके सामने मुद्दा उठाया।
उपभोक्ता परिषद द्वारा ऊर्जा मंत्री को भारत सरकार वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन सं.-12/2017 की प्रति सौंपते हुए कहा कि बिजली के ट्रांसमिशन व वितरण की सेवाओं पर जीएसटी शून्य है, ऐसे में किस आधार पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की अनेकों सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूल की जा रही है।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा ने पूरे मामले पर गम्भीरता से चर्चा करते हुए उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया गया कि जिन सेवाओं पर जीएसटी नहीं लगनी चाहिए, उन सेवाओं पर किस आधार व किस नियम पर जीएसटी लगायी गयी है। पूरे मामले का परीक्षण कराकर प्रदेश के उपभोक्ताओं के हित में सरकार द्वारा जल्द उचित निर्णय लिया जायेगा। उ.प्र. राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली पर सरकार द्वारा इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के रूप में अलग-अलग विद्युत उपभोक्ताओं से घरेलू में 5 प्रतिशत व अन्य श्रेणी में 7.5 प्रतिशत व 20 प्रतिशत तक की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी वसूल की जाती है, जो विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानानुसार स्टेट कान्क्रेन्स यानि की राज्य सरकारों के अधिकार बिजली कर लगाने की व्यवस्था में शामिल है।
ऐसे में कानूनन जीएसटी लागू ही नहीं किया जा सकता और शायद इसी के मद्देनजर केन्द्र सरकार द्वारा बिजली व ट्रांसमिशन सेवाओं को जीएसटी की परिधि में नहीं रखा गया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी भी बिजली की सेवा में जीएसटी वसूल हो रही है, तो उसका आदेश बिजली कम्पनियां सार्वजनिक करें। विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानानुसार नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ जिसका नोटिफिकेशन भी सरकार द्वारा जारी किया जाता है। बकाये पर कनेक्शन जोड़ना व काटना टैरिफ आदेश की श्रेणी में आता है, ऐसे में यह वसूली आयोग के आदेशों का उल्लंघन है।
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