दुर्लभ रोग: उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए निर्धारित 50 लाख रुपये की ऊपरी सीमा पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने कहा है कि समूह 3 श्रेणी में आने वाले कुछ दुर्लभ रोगों के लिए यह सीमा अपर्याप्त है। यह आदेश कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है, जिनमें दुर्लभ रोग से पीड़ित मरीजों और उनके अभिभावकों ने निःशुल्क और निर्बाध उपचार की मांग की थी। न्यायालय ने दुर्लभ रोगों के लिए राष्ट्रीय निधि (NFRD) की स्थापना का भी आदेश दिया है और इसके लिए 2024-25 और 2025-26 के वित्तीय वर्षों के लिए 974 करोड़ रुपये आवंटित करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से दुर्लभ रोग पीड़ितों को बड़ी राहत मिली है और देश में दुर्लभ रोगों के उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

दुर्लभ रोगों के लिए 50 लाख रुपये की सीमा में बदलाव

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति के अंतर्गत दुर्लभ रोगों के इलाज के लिए निर्धारित 50 लाख रुपये की ऊपरी सीमा को अपर्याप्त बताते हुए केंद्र सरकार को इसे फिर से देखने का निर्देश दिया है। यह फैसला समूह 3 श्रेणी के दुर्लभ रोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिनके उपचार में बहुत अधिक लागत आती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि समूह 3 में शामिल रोगों जैसे DMD, SMA, गौचर आदि के लिए NRDC (राष्ट्रीय दुर्लभ रोग समिति) की सिफ़ारिशों के अनुसार यह सीमा लचीली होनी चाहिए।

समूह 3 के रोगों की विशेष चुनौतियाँ

समूह 3 के दुर्लभ रोगों का इलाज बेहद महँगा और जीवनभर चलने वाला होता है। इसलिए, 50 लाख रुपये की सीमा कई मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं होती। यह फैसला इन मरीजों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे उन्हें उचित और पर्याप्त इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

NRDC की भूमिका और NFRD का गठन

न्यायालय ने राष्ट्रीय दुर्लभ रोग समिति (NRDC) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। NRDC समूह 3 श्रेणी के रोगों के लिए उपचार लागत पर सिफ़ारिशें देगा। इसके अलावा, न्यायालय ने राष्ट्रीय दुर्लभ रोग निधि (NFRD) के गठन का आदेश दिया है, जिसमें 2024-25 और 2025-26 के लिए 974 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएँगे। इस निधि से मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और धन संग्रह

न्यायालय ने कंपनियों, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी शामिल हैं, को दुर्लभ रोगों के लिए दान देने के लिए कंपनी अधिनियम की अनुसूची VII में संशोधन करने का निर्देश दिया है। इससे कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत दुर्लभ रोगों के लिए अधिक धन जुटाया जा सकेगा। साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संचालित क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया है। इससे भी दुर्लभ रोगों के लिए अधिक धन जुटाने में मदद मिलेगी।

CSR की प्रभावशीलता और पारदर्शिता

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से धन संग्रह को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं में सुधार किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि धन का सही उपयोग हो और मरीजों को अधिकतम लाभ मिले।

क्राउडफंडिंग प्लेटफार्म का प्रचार-प्रसार

क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार-प्रसार से ज़्यादा लोगों तक इसकी जानकारी पहुँचेगी और ज़्यादा लोग दान कर पाएँगे। यह दुर्लभ रोग पीड़ितों की मदद करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होगा।

राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सूचना पोर्टल और रोगियों का डेटाबेस

न्यायालय ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सूचना पोर्टल विकसित करने और संचालित करने का निर्देश दिया है। इस पोर्टल में रोगी रजिस्ट्री, उपलब्ध उपचार, उपचार के लिए निकटतम उत्कृष्टता केंद्र (CoEs), और निधि के उपयोग पर अपडेट शामिल होंगे। यह पोर्टल रोगियों, डॉक्टरों और आम जनता के लिए सुलभ होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि दुर्लभ रोगों से पीड़ित रोगियों की संख्या का कोई उचित विश्लेषण नहीं है। इसलिए, रोगियों के संपर्क विवरण सहित उनके लिए एक उचित डेटाबेस और केंद्रीय एजेंसी बनाने की आवश्यकता है ताकि उन्हें मूल्यांकन और उपचार के लिए निकटतम उत्कृष्टता केंद्र में भेजा जा सके।

डेटाबेस निर्माण की चुनौतियाँ और अवसर

राष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ रोग पीड़ितों का एक डेटाबेस बनाना एक बड़ी चुनौती होगा, परन्तु यह उपचार में सुधार और रिसर्च को बढ़ावा देने में काफी सहायक होगा।

पोर्टल की उपयोगिता और पहुंच

राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सूचना पोर्टल रोगियों, डॉक्टरों और आम जनता के लिए अत्यंत उपयोगी होगा। इससे रोगियों को उपचार और सहायता पाने में आसानी होगी।

निष्कर्ष

यह आदेश दुर्लभ रोगों से जूझ रहे लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। 50 लाख रुपये की सीमा में छूट, NFRD का गठन, CSR में बदलाव, और राष्ट्रीय सूचना पोर्टल, ये सभी कदम दुर्लभ रोगों के उपचार और प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं, जैसे कि रोगियों की सही संख्या का पता लगाना और उनकी ज़रूरतों के मुताबिक उपचार मुहैया कराना।

मुख्य बातें:

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने दुर्लभ रोगों के उपचार के लिए 50 लाख रुपये की सीमा पर पुनर्विचार का आदेश दिया है।
  • राष्ट्रीय दुर्लभ रोग निधि (NFRD) की स्थापना की गई है।
  • कंपनियों के लिए CSR के तहत दान करने का प्रावधान किया गया है।
  • एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय दुर्लभ रोग सूचना पोर्टल विकसित किया जाएगा।

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