कांग्रेस के ‘हार्दिक’ बोनस को ऐसे छीन सकती है BJP
गुजरात चुनाव के लिए मतदान से पहले कांग्रेस को पाटीदारों का समर्थन मिल गया है. हार्दिक ने साफतौर पर कह दिया है कि कांग्रेस ने जो प्रपोजल दिया है उससे वो काफी हद तक सहमत हैं. जिस तरह से पटेल समाज का समर्थन कांग्रेस को मिला है, इससे पार्टी को फायदा मिलेगा.
जब से कांग्रेस ने लिस्ट जारी की थी तब से पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) और कांग्रेस में मतभेद की खबरें आ रही थीं. इससे कांग्रेस को राहत मिल गई है, क्योंकि हार्दिक ने साफतौर पर कहा है कि उसने कोई टिकट नहीं मांगी है. अगर पास का कोई कार्यकर्ता निर्दलीय भी लड़ता है, तो वो कांग्रेस के साथ रहे.
दूसरी ओर बीजेपी के पास मौका है ये दिखाने का कि हार्दिक पूरी तरह कांग्रेस के साथ है. ये पाटीदारों की संस्था नहीं है.हालांकि गौर करने वाली बात है कि गुजरात में पाटीदारों से जुड़ी दो संस्थाएं हैं, लेउवा पटेलों की खोड़ाधाम और कड़वा पटेलों की उनियाधाम. इन दोनों संस्थाओं ने अभी तक किसी को भी समर्थन नहीं दिया है. ये दोनों संस्थाएं क्या रुख अपनाती हैं इससे चुनाव पर गहरा असर पड़ेगा. ये दोनों ही इंडिपेंडेंट संस्था हैं. वो राजनीति में शामिल नहीं होगीं. वो पाटीदारों के हित के लिए सामाजिक आंदोलन करेंगे.
बीजेपी की कोशिश होगी के वो इनका समर्थन हासिल करे. अगर बीजेपी इनको साथ ले आती है, तो इससे हार्दिक का असर भी काफी कम हो सकता है. हार्दिक का असर युवाओं में ज्यादा है, सब पर नहीं. दूसरी तरफ कांग्रेस को ये ध्यान रखना है कि उसे पाटीदारों का जो भी वोट मिलेगा वो बोनस वोट होगा.
लेकिन कांग्रेस इसका कितना फायदा ले पाती है, ये देखने वाली बात होगी. दूसरी ओर दोनों इंडिपेंडेंट संस्थाओं का चुप रहना कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकता है.
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