“बेटी” नाटक समझा गया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
मुख्य अतिथि श्री सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री
संस्कृत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं डा0 इन्द्र कुमार चौरसिया द्वारा आयोजित नाटक ‘‘बेटी’’ का मंचन दिनांक 17.12.2017 को सांयकाल 06 बजे राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह कैसरबाग, लखनऊ में मंचन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि श्री सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री ने कहा डा0 इन्द्र कुमार चौरसिया द्वारा आयोजित एवं निर्देशित नाटक ‘‘बेटी’’ समाज को बदलने के लिए एक सराहनीय प्रयास है। अन्य अतिथि श्री रमापति शास्त्री, कैबिनेट मंत्री, श्रीमती स्वाती सिंह, स्वतंत्र प्रभार मंत्री, श्रीमती संयुक्ता भाटिया, महापौर, श्रीमती सरिता श्रीवास्तव, सचिव, उपस्थित थे। समापन समारोह में डा0 इन्द्र कुमार चौरसिया में आये हुए व्यक्तियों को धन्यवाद दिया।
शहर में राम खेलावन नाम का गरीब आदमी है जो सर पर टोकरी रखकर फल बेचकर अपने परिवार का जीवन यापन कर रहा है। वो चाहता है कि उसके लड़का हो लेकिन एक-एक करके उसके दो लड़कियां हो जाती है। वो यही सोचता है कि इन लड़कियों की जगह यदि उसके लड़के होते तो उसके काम में हाथ बटाते। दोनों बच्चियाँ आरती और पूजा बहुत होनहार है, वो पढ़ना चाहती है तो राम खेलावन बड़ी मुश्किल में दाखिला कराता है।
लड़कियाँ इतनी होनहार होती है कि धीरे-धीरे छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाकर पैसे कमाकर अपनी फीस भरती है और साथ ही घर के खर्च में भी हाथ बटाती है। एक-एक करके दोनों लड़कियाँ हाईस्कूल में टाॅप करती है। हर बार राम खेलावन यही कहता कि इससे क्या होगा, नौकरी मिले तो जाने। एक दिन राम खेलावन दारू पीके आता है और अपनी पत्नी जानकी से वजीफा के रूपये छीनता है तब दोनों लड़कियाँ माँ को बचाती है साथ में यह कहती है कि ‘‘आज के बाद दारू पीके आये तो घर में घुसने नहीं देगे’’। लड़कियाँ दारू के साथ उसका बीड़ी पीना भी छुड़ा देती है। अब लड़कियाँ बड़ी हो गयी है, उनका खुद का पढ़ना और बच्चों को पढ़ाना दिन-रात चलता रहता है। काॅलेज टाॅप करती मेडल पहनकर घर आती है सभी प्रसन्न होते है, राम खेलावन को छोड़कर। इसके बाद लड़कियाँ आई.ए.एस. परीक्षा में बैठती है और दोनों का नाम आ जाता है, तब राम खेलावन को अहसास होता है कि वो गलत था, उसको लड़कियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना था। और अपनी लड़कियों से अपने व्यवहार के लिए माफी माँगता है।
साथ ही सब से कहता है- ‘‘लड़की बचाव लड़की पढ़ाव।’’ के साथ नाटक का सुखद समापन होता है।
कलाकार-संजय त्रिपाठी, लक्ष्मी निगम, आदित्य कुमार ‘लिप्टन, अजय कुमार धीमान, ध्रुव तिवारी, सचिन सिंह, आरती गुप्ता, चारू शुक्ला, अनामिका शुक्ला, रश्मि रावत, फैसल, सपना, अश्वनी, प्रियांशु, समायर सिंह, मनीष सैनी, विनय वर्मा।
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