कानपुर आइआइटी के बायोमेट्रिक ‘फूल डॉट को’ प्रदेश का पहला ऐसा स्टार्टअप बन गया है, जिसे इंडियन एंजल नेटवर्क ‘आइएएन’ की ओर से 10.5 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। यह कामयाबी आइआइटी स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में स्थापित बायोमेट्रिक स्टार्टअप के संस्थापक काकादेव निवासी अंकित अग्रवाल व प्रतीक कुमार ने हासिल की है।

अंकित के नाम अवार्ड की फेहरिस्त
अंकित को संयुक्त राष्ट्र यंग लीडर अवार्ड मिल चुका है। वर्ष 2018 में फोर्ब्स सूची में भी उनका नाम शामिल किया गया था। इसके अलावा मेक्सिको में उन्हें ‘गिफ्टेड सिटीजन अवार्ड’ और जापान विश्वविद्यालय के टकेडा फाउंडशेन ने एंटरप्रेन्योर आॅफ दि इयर के खिताब से भी नवाजा गया है। उन्हें एशिया सस्टेनेबिलिटी अवार्ड-2020 से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब इंडियन एंजल नेटवर्क ‘आइएएन’ ग्रुप ने स्टार्टअप ‘फूल डॉट को’ के लिए काकादेव निवासी अंकित अग्रवाल व प्रतीक कुमार को साढ़े 10 करोड़ का अनुदान दिया है। अंकिल अग्रवाल व प्रतीक कुमार ने पुणे विश्वविद्यालय से वर्ष 2011 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक की पढ़ाई की है। उत्तर प्रदेश में किसी स्टार्टअप को मिलने वाला यह अबतक का सबसे बड़ा अनुदान है।
फूलों से तलाशा चमड़े का विकल्प
फूल डॉट को नाम से स्टार्टअप शुरू करने वाले अंकित और प्रतीक ने प्रयोग में लाये जा चुके फूलों से चमड़े का विकल्प तलाशा है, इसके लिए कोयला रहित अगरबत्ती बनाने और पर्यावरण मित्र थर्माकोल बनाने के लिए आइएएन ग्रुप ने अनुदान दिया है। अंकित ने हाल ही में फूलों से चमड़े का विकल्प व अगरबत्ती बनाने का प्लांट तिरुपति में स्थापित किया है। उनकी टीम प्रतिदिन 11 टन फूलों से थर्मोकोल, ग्रीन फ्लेदर व ईको फ्रेंडली अगरबत्ती बना रही है, जबकि लक्ष्य 50 टन फूल प्रतिदिन इकट्ठा करके उनसे उत्पाद बनाने का है।
अंकित बताते हैं कि फिलहाल मथुरा और वृंदावन से प्रयोग में लाए जा चुके फूल एकत्र करके उत्पाद बनाए जा रहे हैं। अब फूलों से बनाए गए लेदर के विकल्प को विदेशी बाजार तक पहुंचाने के लिए फोकस रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर है, वह मेड इन इंडिया की तर्ज पर वह उत्पाद बना रहे हैं। पूजन के लिए जलाई जाने वाली अगरबत्ती की खासियत यह है कि पैकेट खाली होने पर उसे गमले में डालने से तुलसी का पौधा निकल आता है।

10 वर्षों में पांच हजार करोड़ का निवेश
इंडियन एंजल नेटवर्क ‘आइएएन’ ग्रुप ने 10 वर्षों में पांच हजार करोड़ का निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश आम आदमी की जरूरत पूरी करने व पर्यावरण के लिहाज से उत्पाद बनाने वाले पांच सौ स्टार्टअप के बीच किया जाएगा।
- महिलाओं को रोजगार देने के लिए स्टार्टअप ‘फूल डॉट को’ बड़ा काम कर रहा है। स्टार्टअप ने मंदिरों से फूलों को इकट्ठा करने व उनसे उत्पाद बनाने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई है। आइआइटी को इस शोध कार्य में स्टार्टअप को तकनीकी सहयोग देने की खुशी है। -प्रो. अभय करंदीकर, निदेशक आइआइटी
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