रमजान में खुल जाते हैं जन्नत के दरवाजे.हर दुआ होती है कबूल। पविञ रमजान का महीना अल्लाह की रहमतों व बरकतों से भरा हुआ है।अल्लाह ने पुरे रमजान महीने के रोजे हर मुसलमान पर फर्ज किए है. इस्लाम में रमजान के महीने को सबसे पाक महीना माना जाता है. रमजान के महीने में कुरान नाजिल हुआ था. रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं. शैतानों को जंजीरें में जकड़ दिया जाता है.अल्लाह रोजेदार और इबादत करने वालों की दुआ कूबुल करता है और इस पवित्र महीने में गुनाहों से बख्शीश मिलती है.रमजान के महीने का पहला अशरा(दस दिन)रहमत का.दुसरा अशरा मगरिफरत व तीसरा अशरा दोजख से आजादी दिलाने का है/रमजान मे एक ऐसी रात होती जो हजारों महीनों से अफजल हैं। रोजा बदन की जकात हैं।
रोजे से छूट किसे
बच्चों, बुजुर्गों, मुसाफिरों, गर्भवती महिलाओं और बीमारी की हालत में रोजे से छूट है. जो लोग रोजा नहीं रखते उन्हें रोजेदार के सामने खाने से मनाही है.
बंदे को याद रहे कि यह जिन्दगी उस खुदा की नेमत है.जिसे तू रोजी रोटी के चक्कर में भूला बैठा है.कुछ समय अल्लाह की इबादत के लिये निकाल ले ताकि खुदा का रहम ओ करम तुझ पर बना रहे .इसलिये इस्लाम में खुदा की इबादत के लियें रमजान को बरकतों व रहमतों का महीने का नाम दिया है.
हर मुसलमान रमजान में रोजे रखें और अल्लाह की इबादत करें.गरीबों यतीमों की मदद करें।
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