कभी सपा के ख़ास थे, अब योगी आदित्यनाथ ने सौंपी यूपी की कमान

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उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक बनने से ओम प्रकाश सिंह की नियुक्ति काफी हद तक चैंकाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि जिन लोगों का नाम रेस में चल रहा था, उसमें ओपी सिंह का नाम दूर दूर तक नहीं लिया जा रहा था. उनकी नियुक्ति पर चैंकाने वाली एक बात ये भी है कि एक समय में वे मुलायम सिंह यादव के बेहद खघस अधिकारी माने जाते थे.। यूपी के सियासी गलियारों में ओपी सिंह की नियुक्ति को योगी आदित्यनाथ के जातिवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि योगी आदित्यनाथ की बिरादरी से आने वाले दूसरे पुलिस अधिकारी भी रेस में थे, ऐसे में पहले बात उस रेस की जिसमें ओपी सिंह ने अपने से चार सीनियर आईपीएस अधिकारियों को पीछे छोड़ दिया है.सुलखान सिंह के बाद जिस अधिकारी का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा था वो प्रवीण कुमार सिंह थे. डीजी फायर सर्विस के तौर पर तैनात प्रवीण सिंह वरिष्ठता क्रम में सबसे आगे थे और माना जा रहा था कि जिस तरह से वरिष्ठता क्रम को देखते हुए सुलखान सिंह को तैनात किया गया था, वैसे ही ये जिम्मेदारी प्रवीण सिंह को दी जा सकती है.।

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मीडिया में जिन लोगों के नामों की चर्चा थी वे लोग भी रेस में थे, लेकिन मुख्यमंत्री ऐसे अधिकारी की नियुक्ति चाहते थे जिसकी छवि रिजल्ट देने वाले अधिकारी की रही हो.। यूपी पुलिस के साथ विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाने के अलावा सीआईएसएफ में ओपी सिंह के कार्यकाल की काफी संतोषजनक माना जाता है. चाहे वो वीआईपी सुरक्षा का मसला हो या एयरपोर्ट पर सुरक्षा. उनके काम की तारीफ होती रही है. नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स में भी नई तकनीक लाने का श्रेय ओपी सिंह को दिया जाता है.मूल रूप से बिहार के गया जिले के ओपी सिंह के सामने अपने करियर के शिखर पर ऐसे राज्य की पुलिस व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी है, जिसने बीते एक साल में 895 एनकाउंटर करने का काम किया है. नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो के मुताबिक राज्य में चार हजार से ज्यादा लोगों की सालाना हत्याएं होती हैं और तीन लाख तक सालाना मुकघ्दमे दर्ज होते हैं.ओपी सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूपी पुलिस की भ्रष्ट छवि को दुरुस्त करने के साथ साथ अपराध की रफ्तार को कम करने की होगी. इस दौरान राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव नहीं बिगड़े, इसकी चुनौती भी उन्हें निभानी होगी. ओपी सिंह की छवि जितनी आक्रामक और सख्त पुलिस अधिकारी की रही है, उतना ही लगाव उनका संगीत से भी रहा है. खघस मौकों पर वे खुद बेहतरीन आवाज में गाने गाते रहे हैं. मुकेश को अपना पसंदीदा गायक मानने वाले ओपी सिंह के गायक का अंदाज आप इस लिंक पर देख सकते हैं.।

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लेकिन ओपी सिंह की तैनाती में जिस बात की सबसे अहम भूमिका रही है, वो है इनके पास कार्यकाल के लिए दो साल का वक्त अभी बाकी है. योगी आदित्यनाथ 2019 के आम चुनाव को देखते हुए इस पद पर वैसे शख्स को बिठाना चाहते थे, जिसके पास कम से कम दो साल का कार्यकाल हो. हालांकि हकीकत यही है कि योगी आदित्यनाथ ने पहले सुलखान सिंह और अब ओपी सिंह को राज्य पुलिस की कमाना सौंपी हैं, जो उनकी अपनी बिरादरी से आते हैं. अगर यही स्थिति पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव या मायावती के कार्यकाल में बनती तो मीडिया में जातीय रंग देकर पेश करती.। वैसे दिलचस्प ये भी है कि अखिलेश यादव ने जनवरी, 2015 में जगमोहन यादव की वरीयता को नजरअंदाज करते हुए अरविंद कुमार जैन को पुलिस प्रमुख बनाया था, हालांकि जैन के बाद जब जगमोहन यादव छह महीने के लिए पुलिस महानिदेशक बने थे तब अखिलेश सरकार पर जातीयता के खूब आरोप लगे थे. बहरहाल योगी सरकार द्वारा ओम प्रकाश सिंह को अहम जिम्मेदारी को लेकर कई विश्लेषक इसलिए भी चैंक रहे हैं क्योंकि कभी इनकी पहचान मुलायम सिंह यादव के खघस अधिकारी की रही है.
यूपी के सियासी मामलों पर नजर रखने वाले लोग आज भी 2 जून, 1995 का गेस्ट हाउस कांड नहीं भूले होंगे जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर लखनऊ के मीराबाई मार्ग के स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती पर हमला कर दिया था. राज्य सरकार से समर्थन वापस लेने के चलते मायावती पर ये हमला हुआ था.तब लखनऊ जिला पुलिस प्रमुख का पद ओम प्रकाश सिंह के पास ही था. उन पर आरोप लगा था कि उनके नेतृत्व वाली पुलिस समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के सामने मूक दर्शक बनी रही थी.यूपी की राजनीति को नजदीक से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता बताते हैं, ओपी सिंह पर लगे आरोप इसलिए भी गंभीर थे क्योंकि उन्होंने 2 जून, 1995 को तड़के ही जिले का प्रभार संभाला था. एक जून को उन्हें मुलायम सिंह ने बुला लिया था।
इससे पहले भी वो कई मौकों पर मुलायम सिंह के कृपा पात्र बने थे. दिसंबर, 1993 में बहुजन समाज पार्टी के समर्थन की बदौलत मुलायम मुख्यमंत्री बने थे. अप्रैल 1994 में बुलंदशहर के हस्तिनापुर विधानसभा उप-चुनाव से ठीक पहले जिला पुलिस ने इलाके के कुखघ््यात गैंगस्टर महेंद्र फौजी का इनकाउंटर किया था. तब ओपी सिंह बुलंदशहर के एसएसपी हुआ करते थे. ।

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