मुंबई। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की सीट को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद से ही शिवसेना ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सरकार बनाने की बात पर अड़ी हुई है। भाजपा विधायकों के लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी होने का हवाला देते हुए इस फॉर्मूले पर सहमत नहीं है। आपको बताते जाए कि कल भाजपा और शिवसेना ने अलग-अलग महाराष्ट्र के राज्यपाल से मुलाकात की थी।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद पर अपना हक जताने के साथ भाजपा और शिवसेना निर्दलीय विधायकों के माध्यम से अपने समीकरण को सुधारने में जुट गई हैं। 6 निर्दलीय विधायकों ने दोनों दलों के समर्थन की बात कह चुके हैं। इनमें से 3 निर्दलीय विधायकों ने भाजपा और 3 ने शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।
इसके अलावा प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायक शिवसेना के साथ आ खडे़ हुए हैं। दबाव की राजनीति के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 30 अक्टूबर को मुंबई पहुंचने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार के गठन के फॉर्मूले को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
वहीं भाजपा के साथ तीन निर्दलीय विधायकों में गीता जैन, राजेंद्र राउत और रवि राणा शामिल हैं। गीता जैन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। विधानसभा चुनाव में ये तीनों नेता भाजपा से टिकट चाहती थीं। ऐसा न होने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। विधायक राजेंद्र राउत, रवि राणा भी भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ा था।
महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने बताया कि मुख्यमंत्री बीजेपी का था, है और आगे भी रहेगा। हमारे साथ 15 निर्दलीय विधायक हैं। छोटे दलों के कुछ और विधायक संपर्क में हैं।
आपको बताते जाए कि महाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने चुनाव में 105 और शिवसेना ने 56 सीटें जीती हैं।
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