निजामुद्दीन मरकज में होता था धर्मांतरण ! जानिए उत्तराखंड के सुलेमान की कहानी

[object Promise]

देहरादून । तो क्या तब्लीगी जमात अपने प्रभाव में लेकर धर्मान्तरण का काम भी करा रही थी! ये सवाल इसलिए क्योकि देहरादून (Dehradun) से दिल्ली (Delhi) निजामुद्दीन मरकज (Nizamuddin Markaz ) गई जमात में सुलेमान नाम का युवक भी शामिल है जिसके पिता का नाम अनिल रस्तोगी है। यह जानकारी सामने आने के बाद जब इस मामले की नवोदय टाइम्स ने तहकीकात शुरु की तो चौकाने वाले तथ्य सामने आये है।

सुलेमान नई पटेलनगर ग्रांधी ग्राम का है निवासी
ये धर्मान्तरण का एक पुराना मामला है जिसमें किसी किसी भी प्रकार के दवाब से इंकार किया गया है। फिलहाल सुलेमान नई पटेलनगर ग्रांधी ग्राम का निवासी है। उसका नाम उस सूची मे है जो देहरादून से दिल्ली निजामुद्दीन मरकज गई जमात में शामिल हुए थे। उसके बाद अभी तक लौट कर वापस नहीं आये है।

सहसपुर धर्मावाला की एक जमात के आया था दिल्ली
सुलेमान सहसपुर धर्मावाला की एक जमात के साथ दो मार्च को चार माह के लिए जमात में दिल्ली गया हुआ है। वह मूल रुप से सहारनपुर के गंगोह का रहने वाला है। सूत्र बतातें है कि उसने लगभग सात साल पहले ये कहते हुए धर्मान्तरण कर लिया था कि वह स्वैच्छा से धर्मान्तरण कर रहा है। उसने इसके लिए अदालत का रास्ता अपनाया था। ताकी भविष्य में किसी भी तरह का कोई विवाद ना खड़ा हो। तभी से वह अपने परिवार से अलग रहता है।

क्या है तबलीगी जमात?
दरअसल, तबलीगी जमात से जुड़े लोग पूरी दुनिया में इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करने का काम करते हैं। इन लोगों की जमातें (ग्रुप्स) देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज पहुंचते हैं और फिर यहां से उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है जहां की मस्जिदों में ये लोग ठहरते हैं और वहां के लोकल मुसलमानों से नमाज पढ़ने और इस्लाम की दूसरी शिक्षाओं पर अमल करने की अपील करते हैं।(साभार : नवोदय टाइम्स)

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *