क्या एक बार फिर सत्ता की राह तलाश रहे साइकिल के सहारे अखिलेश यादव ?

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लखनऊ। केंद्र सरकार द्वारा संसद के दोनों सदनों से नागरिकता संसोधन एक्ट के खिलाफ मचे बवाल और विरोध प्रदर्शन पिछले माह से देश के कई हिस्सों में जारी हैं। वहीं इस विरोध प्रदर्शन का केंद्र दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश भी रहा है जहाँ कांग्रेस पार्टी अन्य राजनीतिक दलों से आगे खड़ी नजर आ रही है।

खासकर यूपी में जहां प्रियंका गांधी वाडरा प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को पीछे छोड़ते हुए सबसे आगे निकालकर सड़क पर प्रमुख विपक्षी नेता की जगह लेती दिख रही है। इसी के चलते सपा अध्य्क्ष अखिलेश यादव भी अब अपने पार्टी कार्यालय और ट्विटर से बाहर निकल कर सड़क पर उतरने जा रहे है । पार्टी सूत्रो के अनुसार वो एक बार फिर से प्रदेश में ‘साइकिल यात्रा’ निकाल कर केंद्र और प्रदेश भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे और अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को जनता के बीच मे दुबारा ले जाएंगे।

गौरतलब है कि अपनी “साइकिल यात्रा” के दौरान अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पूरी हुई परियोजनाओं का दौरा करते हुए राज्य में योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों की तुलना करेंगे। इस यात्रा के दौरान वो एक साथ कई राजनीतिक उद्देश्य पर एक साथ काम करेंगे, एक तरफ वो जहाँ युवाओं और किसानों से मुलाकात करेंगे और अपने कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बारे में उनसे बात करेंगे।

दूसरी तरफ वो सड़क पर साइकिल चलाकर अपने संगठन और कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम करेंगे, जो लोक सभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से थोड़े निराश और हताश हो गए थे। ज्ञात हो कि वर्ष 2012 में भी उन्होंने प्रदेश में ‘साइकिल यात्रा’ की थी जिसके बाद सपा ने यूपी में उनके नेत्रत्व में सरकार बनाई थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी ने बताया कि जल्द ही सपा अध्यक्ष की ‘साइकिल यात्रा’ की तारीखों और विस्तृत मार्ग का ऐलान होगा जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता हिस्सा लेंगे।

प्रदेश में प्रियंका गांधी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से परेशान अखिलेश यादव एक बार फिर सड़क पर संघर्ष कर अपनी पार्टी और संगठन में जान फूकने को मजबूर है। इसी कारण से वो इस साल यूरोप में अपने परिवार के साथ शीतकालीन अवकाश मनाने भी नहीं गए। इससे पहले पिछले कई वर्षो से अखिलेश यादव दिसंबर में शीतकालीन अवकाश और जून-जुलाई में ग्रीष्मकालीन अवकाश पर यूरोप घूमने जाते रहे हैं ।

सपा को लगता है कि अगर वो सड़क पर उतरकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में सरकार को घेरती और आंदोलन करती नजर आएगी, तो नागरिकता संसोधन एक्ट (सीएए) कानून के बाद अपल्पसंख्यकों में उपजे रोष और विरोध के कारण मुस्लिम मतदाताओं का साथ उनकी पार्टी को मिल सकता है। इससे पहले अक्तूबर 2019 में उत्तर प्रदेश विधान सभा उपचुनाव कि 11 सीटों पर उसे अकेले लड़ते हुए 22.61 प्रतिशत वोट के साथ तीन सीटों पर सफलता मिली थी। जबकि सात सीटों पर भाजपा व एक सीट पर सहयोगी अपना दल (एस) ने जीत हासिल की थी।

वहीं 2017 की तुलना मे भाजपा और बसपा को एक-एक सीट गंवानी पड़ी थी, लेकिन अकेले लड़ते हुए भी सपा को दो सीटों का लाभ हुआ था। जिसमें आजम खां ने रामपुर में अपनी पत्नी को जिताकर अपना वर्चस्व कायम रखा था । वहीं अंबेडकरनगर के जलालपुर में सपा ने बसपा से सीट झटकी थी, जबकि बाराबंकी के जैदपुर में सपा ने भाजपा से सीट छीनी थी।

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