शनिदेव की कृपा पाने के अचूक उपाय और रहस्यमय तथ्य

शनिदेव की कृपा पाने के अचूक उपाय और रहस्यमय तथ्य!

क्या आप जानते हैं शनिदेव की नजर पड़ने से जीवन में कैसे आती हैं परेशानियाँ? क्या आप जानते हैं शनिदेव को प्रसन्न करने के सरल और प्रभावी उपाय? अगर नहीं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें, क्योंकि आज हम आपको शनिदेव से जुड़े कुछ रोचक और रहस्यमय तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके जीवन को बदल सकते हैं! शनिदेव की कृपा पाने के लिए आज ही जानें ये अचूक उपाय!

शनिदेव की टेढ़ी दृष्टि का रहस्य

हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता माना जाता है, लेकिन उनकी दृष्टि अशुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि शनि की क्रूर दृष्टि से बचने के लिए कई उपाय किए जाते हैं, जैसे तेल चढ़ाना, दीपक जलाना आदि। पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव की पत्नी ने क्रोध में आकर शनिदेव को शाप दिया था जिसके कारण उनकी नजर जिस पर भी पड़ती है, उसका जीवन दुखों से भर जाता है। शनिदेव की कुदृष्टि से बचने और उनके प्रकोप को शांत करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। शनिदेव की कुदृष्टि और उससे बचने के उपायों को समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये उपाय आपको जीवन की कठिनाइयों से बचा सकते हैं। शनि साढ़ेसाती और शनि ढैय्या जैसे कालखंडों से बचने के लिए भी कई उपाय बताए गए हैं, जिनका पालन करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

शनि की साढ़ेसाती से बचने के उपाय

शनि की साढ़ेसाती एक कठिन कालखंड होता है। इस दौरान जातक को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साढ़ेसाती से बचने और इसके प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जैसे शनि मंत्र का जाप करना, शनिदेव की पूजा करना, दान-पुण्य करना और शनि ग्रह को प्रसन्न करने के लिए उपाय करना।

शनि ढैय्या से बचाव के तरीके

शनि ढैय्या भी एक कठिन कालखंड है। इसके प्रभाव से बचने के लिए नियमित रूप से शनिदेव की पूजा करें और उपवास रखें। साथ ही, दान-पुण्य करके शनिदेव को प्रसन्न करें। शनिदेव की कृपा से आपको इस कठिन कालखंड से बचाया जा सकता है।

शनि को तेल क्यों चढ़ाते हैं?

कहा जाता है कि एक बार हनुमान जी ने शनि देव से युद्ध किया था, जिसमें शनि देव घायल हो गए थे। उनके घावों को भरने के लिए हनुमान जी ने उन्हें तेल लगाया था। इस घटना के बाद से ही शनि देव को तेल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि तेल चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जातक पर कृपा बरसाते हैं। यह एक पारंपरिक उपाय है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है और शनि के प्रकोप को कम करने में सहायक माना जाता है। तेल चढ़ाने के अलावा, कई अन्य उपाय भी हैं जिनसे शनिदेव को प्रसन्न किया जा सकता है।

तेल चढ़ाने का सही तरीका

शनिदेव को तेल चढ़ाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है। शुद्ध सरसों के तेल का उपयोग करें और उसे शनिवार की शाम को शनिदेव के मंदिर में या घर पर शनिदेव की तस्वीर के सामने चढ़ाएं। तेल चढ़ाते समय, मन में शनिदेव के प्रति श्रद्धा और भक्ति भाव रखना भी ज़रूरी है।

शनिवार को दीपक क्यों जलाते हैं?

शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। शनि देव अंधकार के देवता भी माने जाते हैं। माना जाता है कि शनिवार की शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाने से अंधकार दूर होता है और जीवन में प्रकाश आता है। यह दीपक जलाना शनिदेव को प्रसन्न करने का एक सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है। यह उपाय न केवल शनि देव को प्रसन्न करता है बल्कि जातक को मानसिक शांति भी प्रदान करता है।

दीपक जलाने के अतिरिक्त उपाय

दीपक जलाने के अलावा, शनिवार के दिन व्रत रखना, शनि चालीसा का पाठ करना, शनि स्तोत्र का पाठ करना आदि उपाय भी किए जाते हैं। ये सभी उपाय जातक को शनिदेव के प्रकोप से बचाने में सहायक होते हैं।

शनि का रंग काला क्यों है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनिदेव का रंग काला इसलिए है क्योंकि वे सूर्य देव के पुत्र हैं, लेकिन उनका जन्म सूर्य की छाया से हुआ था। सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण ही उनका रंग काला हो गया था। यह घटना शनि और सूर्य के बीच शत्रुता का कारण बनी। शनिदेव का काला रंग उनके न्यायप्रिय स्वभाव का प्रतीक माना जाता है। उनका रंग अंधकार को दर्शाता है, लेकिन उनकी न्यायप्रियता प्रकाश की ओर ले जाती है।

शनिदेव से जुड़े अन्य रहस्यमय तथ्य

शनिदेव से जुड़े और भी कई रहस्यमय तथ्य हैं जो लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं। इन रहस्यों को समझना उनके प्रति आस्था और श्रद्धा को बढ़ा सकता है।

Take Away Points

  • शनिदेव को प्रसन्न करने के कई सरल और प्रभावी उपाय हैं।
  • शनिदेव की कुदृष्टि से बचने के लिए तेल चढ़ाना, दीपक जलाना आदि उपाय किए जाते हैं।
  • शनि साढ़ेसाती और शनि ढैय्या से बचने के लिए भी कई उपाय बताए गए हैं।
  • शनिदेव से जुड़े कई रहस्यमय तथ्य हैं जो उनकी महिमा का प्रतीक हैं।

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