बजरंग पुनिया बनाम NADA: क्या है पूरा सच?

बजरंग पुनिया का NADA पर बड़ा हमला: क्या है पूरा मामला?

भारतीय पहलवान बजरंग पुनिया, टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता, नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) द्वारा लगाए गए चार साल के प्रतिबंध के खिलाफ CAS (Court of Arbitration for Sport) में अपील करने जा रहे हैं। यह मामला सिर्फ़ डोपिंग टेस्ट से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक साज़िश और महिला पहलवानों के समर्थन में उठाए गए आवाज का बदला लेने का आरोप भी शामिल है। क्या बजरंग पुनिया सच में डोपिंग में शामिल थे या यह एक साज़िश है? आइये जानते हैं पूरी कहानी…

एक्सपायर किट और डोपिंग टेस्ट से इंकार का आरोप

NADA का कहना है कि बजरंग पुनिया ने 10 मार्च को डोपिंग टेस्ट से इंकार कर दिया था। लेकिन बजरंग पुनिया का दावा है कि NADA की टीम ने उन्हें एक्सपायर हो चुकी किट से टेस्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने वीडियो के ज़रिए साबित करने की कोशिश की है कि उनको एक्सपाइर्ड डोप टेस्टिंग किट से टेस्ट करने के लिए मजबूर किया जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उन्होंने डोपिंग टेस्ट कराने से कभी मना नहीं किया, बल्कि केवल वैध किट की माँग की। क्या NADA का काम करने का तरीका सही था या बजरंग पुनिया का आरोप सही है? इस पर बहस जारी है।

राजनीतिक साज़िश का आरोप और महिला पहलवानों का समर्थन

बजरंग पुनिया ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी आरोप लगाया है कि यह चार साल का प्रतिबंध उनके खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक साज़िश का नतीजा है। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों के समर्थन में चलाए गए आंदोलन का बदला लेने के लिए यह कार्रवाई की गई है। उनका कहना है कि यह उनको चुप कराने और गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने से रोकने की कोशिश है। क्या बजरंग पुनिया का यह आरोप सही है या सिर्फ़ एक बचाव है?

NADA और बजरंग पुनिया के बीच विवाद: पूरा इतिहास

यह विवाद 26 नवंबर को शुरू हुआ जब NADA ने बजरंग पुनिया को चार साल के लिए बैन कर दिया। इसके बाद 31 मई को ADDP (अनुशासनात्मक डोपिंग पैनल) ने इस बैन को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया। NADA ने पुनिया को एक नोटिस दिया और कई सुनवाइयाँ हुईं। ADDP ने 23 अप्रैल को बजरंग पर बैन लगा दिया था, उसके बाद UWW ने भी बजरंग को बैन कर दिया था। अब, बजरंग CAS में अपील करके अपने करियर को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

विनेश फोगाट के केस से मिलती-जुलती स्थिति

बजरंग पुनिया के मामले को विनेश फोगाट के केस से जोड़कर देखा जा रहा है। विनेश फोगाट को भी पेरिस ओलंपिक में वजन अधिक होने के कारण सिल्वर मेडल से वंचित कर दिया गया था। उन्होंने भी CAS में अपील की थी, जो खारिज कर दी गई थी। क्या बजरंग पुनिया को भी ऐसा ही नतीजा मिल सकता है?

क्या हैं बजरंग पुनिया के आगे के विकल्प?

बजरंग पुनिया के पास CAS के अलावा भी कुछ विकल्प हैं। उनके वकील विदुषपत सिंघानिया सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें एंटी-डोपिंग अपील पैनल (ADAP) में अपील करना भी शामिल है। यह देखना दिलचस्प होगा कि CAS उनको कितना न्याय दिला पाता है।

बजरंग पुनिया का जीवन परिचय: एक साधारण परिवार से ओलंपिक तक का सफ़र

बजरंग पुनिया, हरियाणा के झज्जर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता खुद एक पहलवान थे। उन्होंने 14 साल की उम्र में कुश्ती शुरू की और योगेश्वर दत्त जैसे महान पहलवानों के मार्गदर्शन से आगे बढ़े। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने भारत का नाम रोशन किया। इस मुश्किल समय में सभी उनका समर्थन कर रहे हैं।

टेक अवे पॉइंट्स

  • बजरंग पुनिया NADA के चार साल के प्रतिबंध के खिलाफ CAS में अपील करेंगे।
  • उन्होंने NADA पर एक्सपायर किट का इस्तेमाल करने और राजनीतिक साज़िश का आरोप लगाया है।
  • विनेश फोगाट के केस से समानता देखी जा सकती है।
  • बजरंग पुनिया के पास CAS के अलावा और भी विकल्प मौजूद हैं।

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