दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन: क्या है हकीकत?
दिल्ली-एनसीआर में इस साल भी दीपावली पर पटाखों की बिक्री पर रोक है। लेकिन क्या सच में बाजार में पटाखे नहीं मिल रहे हैं? क्या यह बैन वाकई कारगर साबित हो रहा है या फिर धुआँधार दीपावली की तैयारी जोरो पर है? आइए जानते हैं इस सच्चाई का खुलासा।
सदर बाजार का रियलिटी चेक
हमने दिल्ली के सबसे बड़े बाजारों में से एक, सदर बाजार का दौरा किया। सुबह से ही बाजार में भीड़ उमड़ पड़ी थी। लेकिन पटाखों की दुकानों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। बड़े पटाखे तो कहीं दिखाई ही नहीं दिए, छोटे बच्चों के लिए बनाए गए कुछ छोटे-मोटे पटाखे ही बिक्री के लिए रखे गए थे।
बच्चों के खिलौने या पटाखे?
दुकानदारों ने बताया कि उनके पास ज्यादातर चटपटे पटाखे हैं जो बच्चों के लिए हैं। कुछ दुकानों पर छोटी-छोटी फुलझड़ियाँ भी मिलीं, लेकिन दुकानदारों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि इन पर प्रतिबंध है या नहीं। एक दुकानदार के पास कोल्ड फायर कैप्सूल भी थे, जिसका इस्तेमाल वो शादियों में होने वाले आयोजनों में करते हैं।
कैमरे की नज़र से छिपाते दिखे पटाखे
कई दुकानदार कैमरा देखकर पटाखे छिपाने लगे। एक दुकानदार ने बताया कि उसके पास केवल चार डब्बे पटाखे बचे हैं। उसने माना कि इन पर बैन है, लेकिन जब तक कंपनी बना रही है, तब तक वो बेचते रहेंगे। कुछ दुकानदार चोरी-छुपे फुलझड़ियाँ बेचते भी नज़र आए।
बैन कितना कारगर?
बाजार में ज़्यादातर प्रतिबंधित पटाखे नदारद थे, लेकिन चोरी-छुपे कुछ पटाखे मिलने की बात लोगों ने कबूल की। पिछले साल भी पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद दीपावली की रात जमकर पटाखे फोड़े गए थे, जिसका असर अगले दिन हवा की गुणवत्ता पर साफ दिखाई दिया था। इस साल भी पटाखों पर बैन लगा है, लेकिन इसका कितना असर होगा यह तो दीपावली की रात ही पता चलेगा।
क्या है प्रदूषण से बचाव का उपाय?
पटाखों के धुएं से होने वाले प्रदूषण से बचाव के लिए सरकार कई कदम उठा रही है, लेकिन आम जनता का सहयोग भी बेहद ज़रूरी है। पटाखे न जलाने से ही हम इस समस्या से निजात पा सकते हैं। हम सभी को मिलकर इस अभियान में साथ देना होगा और अपने शहर को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने की कोशिश करनी होगी।
Take Away Points
- दिल्ली-एनसीआर में दीपावली पर पटाखों पर बैन जारी है।
- सदर बाजार में छोटे बच्चों के पटाखे ज़रूर मिले, लेकिन बड़े पटाखे नहीं दिखे।
- कई दुकानदार चोरी-छुपे पटाखे बेचते दिखे।
- पटाखों से होने वाले प्रदूषण से बचाव के लिए जनता का सहयोग ज़रूरी है।

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