बिहार के सीएम नीतीश के काफिले पर हमला

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बक्सर । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कापफिले पर कल कुछ लोगों ने पत्थरों से हमला कर दिया। इस हमले में मुख्यमंत्री बाल-बाल बच गए लेकिन उनके काफिलें शामिल कुछ लोग घायल हो गए। नीतिश विकास समीक्षा यात्रा के दौरान शुक्रवार को बक्सर जिले में थे। हालात उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब नंदन गांव से गुजर रहे मुख्यमंत्री के काफिले पर स्थानीय लोगों ने जमकर पथराव कर दिया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने नीतीश कुमार को वहां से सुरक्षित निकाल लिया। गुस्साए लोगों की मांग थी कि नीतीश उनके गांव में कुछ देर रुकें और वहां की समस्याएं सुनें। नीतीश कुमार के काफिले पर हमले को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने एक तरफ दुख व्यक्त किया है, तो दूसरी ओर कहा है कि उनके साथ यह तो होना ही था।तेजस्वी का कहना है कि बिहार में सरेआम मुख्यमंत्री पर हमला हो रहा है, लेकिन इस महा जंगलराज स्थिति पर किसी भी टीवी चैनल पर कोई डिबेट नहीं होता है, क्योंकि जंगलराज का राग अलापने वाले बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी इस वक्त प्रदेश के उप मुख्यमंत्री है। नीतीश और सुशील मोदी पर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि कहीं मुख्यमंत्री पर हमले इसीलिए तो नहीं हो रहे कि वह उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को अपने साथ विकास समीक्षा यात्रा में लेकर नहीं जा रहे हैं?
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तेजस्वी ने ली चुटकी, बोले- ये तो होना ही था

तेजस्वी ने कहा कि जिस दिन से नीतीश कुमार ने समीक्षा यात्रा की शुरुआत की है, उसी दिन से उन्हें लोगों के विरोध, प्रदर्शन और नारेबाजी का सामना करना पड़ रहा है। नीतीश पर तंज कसते हुए तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले अपने व्यक्तित्व और राजनीतिक चरित्र की समीक्षा करनी चाहिए, उसके बाद बिहार के विकास की समीक्षा। उन्होंने कहा कि विकास समीक्षा यात्रा के दौरान नीतीश कुमार की सभा में कहीं जूते-चप्पल चलते हैं, तो कहीं भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस वालों को हवाई फायरिंग करनी पड़ती है। मगर सरकारी तंत्र बहुत ही शातिर तरीके से मुख्यमंत्री के विरोध प्रदर्शन को खबर नहीं बनने देता है। तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश को आत्मचिंतन और मनन और करना चाहिए कि आखिर हर जगह, हर पल और हर क्षेत्र में लोग उनका विरोध क्यों और किस वजह से कर रहे हैं? उन्होंने पूछा कि आखिर मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि किस असुरक्षा की भावना से ग्रस्त होकर वह शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और रोजगार जैसे अति जरूरी और गंभीर मसलों को छोड़कर दूसरे मसलों पर राग अलाप रहे हैं?

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