असीम अरुण: एनएसजी ब्लैक कैट से राजनेता तक का रोमांचक सफ़र!

उत्तर प्रदेश के मंत्री और पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण की एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग की कहानी जानकर आप दंग रह जायेंगे! यह कहानी सिर्फ़ साहस, अनुशासन और दोस्ती की नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रशिक्षण की है जिसने एक आईपीएस अधिकारी को एक नेता बनाया। इस दिलचस्प कहानी में हम उनके प्रशिक्षण के कठिन समय, साथियों के साथ रिश्तों, और उनकी राजनीतिक यात्रा के बारे में जानेंगे। यह कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी!

एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग: मौत का सामना करने की तैयारी

2003-04 में, असीम अरुण ने दिल्ली में एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो की बेहद कठिन ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि एडमिशन फॉर्म में ही मौत के बाद अंत्येष्टि के तरीके के बारे में भी पूछा गया! यह बात अकेले ही बताती है कि यह ट्रेनिंग कितनी जोखिम भरी थी। 33 प्रशिक्षुओं में से एकमात्र आईपीएस अधिकारी होने के नाते उन्हें किसी तरह की छूट की उम्मीद नहीं थी। उन्हें हर चुनौती का सामना अपने दम पर करना था। कठिन अभ्यासों के बीच 5-7 मिनट के विश्राम में भी, उन्हें अन्य प्रशिक्षुओं के साथ चाय बिस्कुट के लिए लाइन में लगना पड़ता था।

कठोर प्रशिक्षण और अनोखा अनुशासन

कठिन शारीरिक और मानसिक परीक्षाओं से भरपूर इस ट्रेनिंग में, हर एक दिन एक नई चुनौती लेकर आया था। चाहे वह बेहद थकाऊ दौड़ हो या जटिल बाधाओं को पार करना, असीम अरुण ने दृढ़ता से सभी कठिनाइयों का सामना किया। यह प्रशिक्षण सिर्फ़ शारीरिक क्षमता ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता भी परखती थी। असीम अरुण के अनुभव दर्शाते हैं कि ‘ब्लैक कैट’ बनने की राह कितनी चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण थी।

दोस्ती की कहानी: एक अफसर और पीएसी जवानों की एकजुटता

ट्रेनिंग के दौरान असीम अरुण के पीएसी के साथी उनके प्रति गहरा सम्मान और चिंता दिखाते थे। वे असीम अरुण को चाय बिस्कुट के लिए लाइन में लगने से रोकने की कोशिश करते थे। अरुण के विचारों से सहमत होते हुए भी उन्होंने उनसे लाइन में न लगने की अपेक्षा की। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कठोर प्रशिक्षण के बावजूद, आपसी सम्मान और दोस्ती कितना मायने रखती है।

मिट्टी से सने हाथों में चाय का प्याला

पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण अपने साथियों की भलाई और समर्थन के प्रति आभारी हैं। वे उनकी मिट्टी से सने हाथों में चाय का पेपर कप आज भी याद करते हैं। इस छोटे से उदाहरण से उन सब के बीच गहरे रिश्ते को दिखाया जाता है जो इस मुश्किल ट्रेनिंग से साथ गुज़रे थे। यह दोस्ती एक कठिन ट्रेनिंग से भी ऊपर उठती दिखती है।

राजनीति में सफ़र: एक प्रशिक्षित कमांडो से राजनेता तक

आईपीएस अधिकारी रहते हुए, असीम अरुण ने अपनी नौकरी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की और 2022 में कन्नौज से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने सपा उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। आज, वे उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्यमंत्री हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा यह दिखाती है कि कठोर प्रशिक्षण ने उन्हें अनुशासन, साहस और नेतृत्व के गुण सिखाये जो राजनीति में भी काम आते हैं।

एक सफल नेता के गुण

आईपीएस से राजनेता बनने के इस सफर ने असीम अरुण को सिर्फ़ लोकप्रियता ही नहीं दी है। इसने उन्हें उन समस्याओं और लोगों की बेहतर समझ भी दी है। उनकी कार्यशैली में आईपीएस और नेता के अनुभव दोनों शामिल है।

टेक अवे पॉइंट्स

  • एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग की कठिनाई
  • साथियों के साथ असीम अरुण का अनोखा रिश्ता
  • आईपीएस से राजनेता बनने का असाधारण सफ़र
  • नेतृत्व कौशल और अनुशासन की महत्ता

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *