उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर। ऋषियों एवं यज्ञ के लिए प्रभु राम का राजमहल से निकलना तो मात्र एक बहाना था, जिसकी संरचना ब्रह्मा जी ने पहले की कर दी थी। पडरौना नगर से सटे क्षेत्र के गांव सिधुआ स्थान के शुक्ला टोला में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन प्रयाग से पधारे कथा वाचक शिवम शुक्ल ने कथा को आगे बढ़ते हुए ये बाते कही । प्रभु श्रीराम संग श्री लक्ष्मण जी के राजमहल से मुनि संग निकलने, राक्षसों को मारकर ऋषिगण एवं यज्ञ की रक्षा करने, मुनि के साथ जनकधाम कि यात्रा, पुष्प वाटिका का भ्रमण, माता जानकी, सखियों के वार्तालाप का सुंदर वर्णन कर श्रोताओं को मनमुग्ध करती रही।
कथा प्रसंग में के दौरान धनुष यज्ञ, श्री परशुराम एवं श्री लक्ष्मण जी के संवाद के उपरांत माता जानकी और प्रभु श्रीराम के विवाह के दौरान श्रोता जहाँ कथा पंडाल में जोश और उत्साह के साथ नृत्य एवं प्रभु के नाम का जयघोष करने लगे, वही जनक नन्दनी के जनकपुर से विदाई की कथा सुन धर्म प्रेमी भावुक भी हुए। कथा वाचक श्री शुक्ल ने कहा कि सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति में राम-सीता आदर्श दम्पत्ति माने गए हैं।जिस प्रकार प्रभु श्रीराम ने सदा मर्यादा पालन करके पुरुषोत्तम का पद पाया, उसी तरह माता सीता ने सारे संसार के समक्ष पतिव्रता स्त्री होने का सर्वोपरि उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पावन दिन सभी को राम-सीता की आराधना करते हुए अपने सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए प्रभु से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
कथा का शुभारम्भ उमेश चंन्द शुक्ल ने मानस पूजन एवं आरती कर किया। इस दौरान जहां संगीत मंडली कथावाचक शिवम शुक्ल के नेतृत्व में सुन्दर भजन से लोगों के मन को मोहित कर रहे थे, वही आयोजन समिति के कार्यकर्ता हर कथा प्रेमी श्रोताओं के सुविधा का ध्यान रखने का प्रयास करते रहे।
इस अवसर पर रौशन शुक्ला ,अमरदीप, सम्मी ,जीवन सिंटू, दिव्यम ,सत्यम, नारायण ,प्रांजल ,बिष्नू, अंकित शुक्ला ,प्रधान प्रतिनिधि आलोक शुक्ला ,सत्येन्द्र मिश्रा आदि लोग शामिल रहे |
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