जननी हूं जगत की सदा मेरा सम्मान करो, नारी हूं मैं मेरा मत अपमान करो

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पᆬोटो : 11 जानपी 3 – कार्यक्रम में उपस्थित महिलाएं

महादेवी महिला साहित्य समिति ने मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

चांपा । महिलाएं अपनी आत्मिक शक्ति को पहचाने तथा आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीए। हमारा व्यक्तित्व प्रखर एवं प्रतिभाशाली होना चाहिए। हमारे ही देश में ऐसे कई उदाहरण है जिन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर अपने लक्ष्य को प्राप्त किया है। उपरोक्त विचार अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महादेवी महिला साहित्य समिति की अध्यक्ष सुशीला सोनी ने व्यक्त किया । इस अवसर पर सत्य भामा साव ने कहा कि भारतीय संस्कृति महिलाओं के प्रति काफी उदार रही है यही कारण था कि वह किसी समय ज्ञान विज्ञान , विद्या बुद्घि, राजनीति, रणनीति ,समाज और गृहस्थ के मामले मामलों में महत्वपूर्ण योगदान देती थी। अन्नापूर्णा सोनी ने कहा कि नारी शब्द देव तुल्य है इसीलिए बेटियां बहू को लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। कल्याणी स्वर्णकार ने कहा कि नारी ममता की मूर्ति है, शक्ति का प्रतीक है और क्षमता की छवि है। इसीलिए उसकी माता और शक्ति के रूप में वंदना की जाती है। सरोजिनी सोनी ने कहा कि महिला की सहज पवित्रता एवं भावनात्मक क्षमता का उपयोग परिवार एवं समाज के उत्थान में किया जाना चाहिए । नीरा प्रधान ने कहा कि महिला उत्थान के लिए शिक्षा संवर्धन एवं आर्थिक स्वावलंबन बहुत आवश्यक है । कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती की तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात साक्षी कटकवार द्वारा सरस्वती वंदना एवं भला किसी का कर न सको तो बुरा किसी का मत करना, पुष्प नहीं बन सकते तो तुम कांटे बनकर मत रहना से हुआ। इस अवसर पर अंजलि देवांगन, रेखा केसरवानी, सुभद्रा सोनी व माधुरी शर्मा के सदस्यता ग्रहण करने पर समिति के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। तत्पश्चात दूसरे दौर में शांता गुप्ता ने दूसरे दौर की शुरुआत इन पंक्तियों से शुरू की – नारी हूं मैं मेरा मत अपमान करो जननी हूं जगत की सदा मेरा सम्मान करो । वहीं कविता थवाईत ने सास के फिल्मी खलनायक के मिथक को तोड़ते हुए कहा यूं सास को बदनाम ना करो वह बहुत बड़ा दिल रखती है, जीवन की जमा पूंजी अपने बहू को सौंपती है। गायत्री ठाकुर ने कहा कि औरत मोहताज नहीं है किसी गुलाब की। वह खुद बागवान है इस कायनात की। सविता कोसे ने कहाकि नारी तू अवतारी है जग में सबसे न्यारी है। फूल नहीं चिंगारी है नारी तू अवतारी है। वही संजू महंत ने मौन है स्त्री निशब्द नहीं आवाज है बस बोलती नहीं। राधिका ने कहाकि कहते हैं ममता की मूरत है नारी प्रेम का हर श्रृंगार है नारी को श्रोताओं ने पसंद किया। गीता केशव सोनी, नीरा प्रधान, मधु गुप्ता, संगीता पांडेय, अल्पना सोनी, रानी शर्मा ने भी अपनी कविताओं से माहौल को खुशनुमा बनाया। कार्यक्रम का संचालन सचिव राधिका सोनी और आभार प्रदर्शन सत्यभामा साव ने किया।

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