घाटी से एक साथ पलायन करेंगे 8000 कर्मचारी

डेस्क। 80-90 के दशक की तरह ही घाटी में कश्मीरी पंडितों के हालात फिर से बिगड़ चुके हैं। घाटी में बीते 2 दिनों के भीतर ही दूसरी हत्या के बाद कश्मीरी पंडित फिर से अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। दंभी प्रदर्शनो को स्थगित करके सबको काजीगुंड में नवयुग टनल के पास एकत्रित होने का निर्देश जारी किया गया है।

बता दें कि दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में 48 घंटे के भीतर दूसरे हिंदू मुलाजिम की हत्या  हुई है जिसके  बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी में सभी जगहों पर प्रदर्शन को स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही शुक्रवार यानी आज जम्मू की ओर सामूहिक पलायन करने का फैसला लिया है। अभी तक 1800 कश्मीरी पंडितों समेत तीन हजार से अधिक सरकारी मुलाजिम घाटी छोड़कर जा चुके हैं।

इसी कड़ी में घाटी में तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। बता दें कि श्रीनगर के इंदिरा नगर इलाके में वीरवार को लगातार दूसरे दिन भी सख्त पाबंदियां जारी है। 

जिस इलाके में कश्मीरी पंडित रहते हैं वहां पुलिस बल और अर्र्धसैनिक बल तैनात है। इस कारण से सभी लोगों के बाहर निकलने पर भी पाबंदी लगाई गई है।

कुलगाम में बैंक मैनेजर की हत्या के बाद से दहशत और भी बढ़ गई है। जब लोग घर मे बंद हैं और उनके पास सोशल मीडिया के अलावा एक्सपोजर का कोई उपाय नही है। ऐसे में कश्मीरी पंडित महिला कर्मचारी का एक वीडियो संदेश वायरल हो रहा है जिसमें महिला जम्मू की ओर रवाना होने की अपील कर रही है। 

वीडियो में उसने कहा  कि हम कई वर्षों से यहां रह रहे हैं लेकिन आज जो स्थिति बनी है वो पूरी तरह सरकार के नियंत्रण से बाहर है और इसलिए हम सभी कर्मचारियों ने फैसला किया है कि हम घाटी छोड़कर जा रहे हैं। अब हम सरकार पर निर्भर है कि वो हमें वहां नौकरियां प्रदान करें।    

सूत्रों की माने तो घाटी में करीबन 8000 कर्मचारी हैं, जिनमे से 1300 को ट्रांजिट कैंप में आवासीय सुविधा मिली है जबकि बाकी के कर्मचारियों को किराये के घरों में रहकर गुजरा करना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक 12 मई को राहुल भट की हत्या के बाद से करीब 1800 कश्मीरी पंडित घाटी से जम्मू की ओर पलायन किया। 

इस कड़ी में पीएम पैकेज के तहत एक कर्मचारी अमित कौल ने जानकारी दी है कि स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। 4 हत्याओ को फिर से अंजाम दिया गया हैं। उन्होंने कहा अभी तक 30-40 परिवार शहर छोड़कर भी जा चुके हैं। उनके (सरकार के) सुरक्षित स्थान केवल शहर के भीतर ही मौजूद हैं, श्रीनगर में कोई सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है।

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