चेन्नई। तमिलनाडु की एक विशेष अदालत ने सोमवार को एक नाबालिग दिव्यांग लडक़ी का यौन उत्पीडऩ करने के दोषी पांच लोगों को आजीवन कारावास, अन्य नौ को पांच साल और एक व्यक्ति को सात साल जेल की सजा सुनाई। यहां के एक अपार्टमेंट परिसर में इस अपराध को अंजाम दिया गया था।
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंडर्स (पोस्को) एक्ट के तहत विशेष अदालत ने शनिवार को 15 आरोपियों को दोषी करार दिया था, एक को बरी कर दिया, जबकि मुकदमे के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
12 साल की श्रवण बाधित लडक़ी का अपार्टमेंट परिसर में लिफ्ट ऑपरेटर, प्लंबर, हाउसकीपर और सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करने वाले दोषियों ने लगभग सात महीने तक यौन उत्पीडऩ किया था। इनमें से कुछ दोषियों की उम्र 50 साल से भी अधिक है।
यौन उत्पीडऩ का यह मामला पिछले साल उस समय सामने आया, जब लडक़ी ने दिल्ली से छुट्टी पर यहां आई अपनी बड़ी बहन को आपबीती बताई। इसके बाद अभिभावकों ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, सबसे पहले लिफ्ट ऑपरेटर ने बच्ची के साथ यौनाचार किया। इसके बाद चार अन्य ने भी उसके साथ बुरा कृत्य किया।
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