अंतिम कुंभ स्नान के दिन विशेष तिलकों से सजेंगी तीनों बैरागी आणियां

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हरिद्वार। चैत्र पूर्णिमा पर मंगलवार को होने वाले कुंभ के अंतिम शाही स्नान की तैयारी पूरी कर ली गई है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए संतों ने भरोसा दिलाया है कि शाही स्नान में प्रत्येक अखाड़े से अधिकतम 100 संत ही भाग लेंगे। इसके अलावा जुलूस में भी संख्या सीमित रखी जाएगी। वाहनों की संख्या भी कम रहेगी।

पुलिस महानिरीक्षक (मेला) संजय गुंज्याल ने शाही स्नान को लेकर मेला अधिष्ठान और पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रिसिंग कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया। गुंज्याल ने बताया कि पिछले दिनों उन्होंने विभिन्न अखाड़ों के पदाधिकारियों के साथ शाही स्नान की व्यवस्था को लेकर चर्चा की थी। संतों ने उन्हें भरोसा दिया है कि स्नान के दौरान कोविड गाइड लाइन का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। स्नान के दौरान मास्क और शारीरिक दूरी का ध्यान रखा जाएगा।

मेला आइजी ने कहा कि शाही स्नान जुलूस के समय राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात डायवर्ट किया जाएगा। इसके अलावा हरकी पैड़ी को भी सुबह सात बजे के बजाय थोड़ा विलंब से आम श्रद्धालुओं के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा। आम श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी के अतिरिक्त अपर रोड व अन्य बाजारों में आने जाने की छूट रहेगी।  अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद शाही स्नान के लिए स्नान का क्रम पहले ही निर्धारित कर चुका है। यह क्रम पिछले शाही स्नान की तरह ही रहेगा।

इसके तहत सबसे पहले श्री निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़े के साथ स्नान करेगा। इसके बाद जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़े की बारी है। तीसरे क्रम पर महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़ा के साथ स्नान करेगा। संन्यासी अखाड़ों के स्नान  के बाद तीनों बैरागी अणियां और उनके अखाड़े स्नान करेंगे। बैरागी अणियों के बाद दोनों उदासीन अखाड़ा और सबसे अंत में निर्मल अखाड़ा स्नान करेगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से नाराज चल रहे बैरागी अखाड़ों ने भी इस स्नान क्रम पर सहमति जताई है।

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