President Election| जैसे-जैसे राष्ट्रपति चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है इसपर सियासत भी जोर पकड़ती जा रही है। आर्थिक राजधानी से शिवसेना (Shiv Sena ) ने एनडीए (NDA) उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) को राष्ट्रपति चुनावों (President Election) समर्थन देने की घोषणा की थी। इस मामले पर शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut ) ने बयान देते हुए कहा है कि हम एनडीए में नहीं हैं, लेकिन द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दे रहे है। ये कोई राजनीतिक समर्थन देना नहीं है क्योंकि इससे पहले भी शिवसेना ने प्रतिभा पाटिल (Pratibha Patil) और प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee ) का समर्थन कर रखा है।
द्रौपदी मुर्मू के मातोश्री दौरे को लेकर संजय राउत ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि वो(द्रौपदी मुर्मू) उद्धव ठाकरे से मिलने के लिए मातोश्री आ रही हैं की नहीं।
इस बयान के बाद उन्होंने महाराष्ट्र में आई भीषण बाढ़ पर भी अपनी बात रखी और कहा कि महाराष्ट्र में 12 दिन बीत गए लेकिन सरकार काम नहीं कर रही। ये (तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार) सरकार अवैध है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि 12 दिनों से महाराष्ट्र के राज्यपाल कहां है? जब महाराष्ट्र में बाढ़ जैसे गंभीर हालात बने हैं।
इससे पहले भी संजय राउत ने कहा था कि द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने का मतलब बीजेपी को समर्थन देना नहीं है। हम आदिवासी नेता के नाम पर द्रौपदी मुर्मू का समर्थन कर रहें। इसके साथ ही जनभावना का खयाल रखते हुए भी यह फैसला लिया गया। आपको बता दें कि विपक्ष के उम्मीदवार को लेकर जब मीटिंग हुई थी, तब उसमें शिवसेना ने भी हिस्सा लिया था। पर मुर्मू को समर्थन देकर पार्टी ने विपक्ष को करारा झटका दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने इस मुद्दे को लेकर सांसदों की मीटिंग बुलाई थी। इसमें 19 लोकसभा सांसदों में से 12 ही पहुंचे और पार्टी की आंतरिक कलह के चलते 7 नेता गायब थे। बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में शामिल सांसदों ने भी ठाकरे पर दबाव बनाया था कि पार्टी को द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) का समर्थन करना चाहिए। जिसपर ठाकरे ने विचार करने को कहा था। पर संजय राउत के बयान ने सब साफ कर दिया।
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