भाजपा को क्यों कहा गया ढोंगी राष्ट्रवादी

राष्ट्रीय:- कांग्रेस आय दिन केंद्र की भाजपा सरकार को सावालो के घेरे में उतारती रहती है। वही अब नुपुर शर्मा द्वारा दिए गए पैगम्बर मोहम्मद पर आपत्तिजनक बयान के बाद से भाजपा कांग्रेस के निशाने पर है। अभी हाल ही में कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर ढोंगी राष्ट्रवादी हैशटैग के साथ एक ट्वीट कर भाजपा को घेरा है। असल मे आज सुबह से सोशल मीडिया पर भाजपा के विरोध में हैश टैग ढोंगी राष्ट्रवादी ट्रेंड कर रहा है।

कांग्रेस ने इस हैश टैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, सवाल: नूपुर शर्मा, रियाज़ अटारी और तालिब हुसैन भी आपकी ही पार्टी का? खुद मेन्स्ट्रीम में रहने के लिए ऐसे कितने फ़्रिंज पाले हैं आपने? इसका भी जवाब दीजिए। BJP सत्ता के लिए अपराध सिद्ध आतंकवादी को भी टिकट देने से नहीं चूकि। इसी भाजपा ने “मोहम्मद फारुख खान” को स्थानीय चुनाव में श्रीनगर के वार्ड नंबर 33 से टिकट दिया था। जो J&K लिबरेशन फ्रंट एवं हरकत उल मुजाहिदीन का सदस्य रह चुका है।
कांग्रेस ने आगे कहा, यह इनकी फंडिंग से मिले पैसों से आतंकवादी हथियार आदि खरीदते थे जिसका इस्तेमाल देश की सेवा में लगे हमारे सुरक्षा बलों के खिलाफ होता था। वर्ष 2017 में एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकियों को आर्थिक मदद देने के आरोप में असम के भाजपा नेता “निरंजन होजाई” को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इन्हें एक हजार करोड़ के वित्तीय घोटाले एवं टेरर फंडिंग मामले में दोषी पाया गया था। 2 साल बाद, 2019 में मध्यप्रदेश में बजरंग दल के एक नेता बलराम सिंह की गिरफ्तारी टेरर फंडिंग के आरोप में हुई थी। आईटी सेल वाले आतंकवादी ही हैं, टेरर फंडिंग भी खुद ही करते हैं, इससे ज्यादा आत्मनिर्भर पार्टी हमने नहीं देखी।
कांग्रेस आगे बोली साल 2017 में मध्यप्रदेश की वह घटना आपको याद होगी जब ATS की टीम ने अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का पर्दाफाश करते हुए ISI के 11 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक BJP आईटी सेल का सदस्य ध्रुव सक्सेना भी शामिल था। मीर पर हिजबुल कमांडर नवेद बाबू को हथियार देने का आरोप था, जो आतंकियों की मदद करने वाले डीएसपी दविंदर सिंह के साथ गिरफ्तार हुआ था। क़रीब दो साल पहले जम्मू कश्मीर में एक ऐसा ही मामला सामने आया था। जब आतंकियों को हथियार मुहैया कराने के आरोप में बीजेपी के पूर्व नेता एवं सरपंच “तारिक़ अहमद मीर” को गिरफ्तार किया गया था। राष्ट्रवाद की बात करने वालों के लिए क्या ये शर्म की बात नहीं है? और यह कोई पहला या दूसरा मौका नहीं है, जब भाजपा के नेता या कार्यकर्ता आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। ऐसी कई घटनाएं हैं।

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