देश- मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बागेश्वर धाम के महाराज पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बीते कई दिनों से सुर्खियों में हैं। उनके चमत्कारों पर सवाल उठ रहे हैं। लोग उनपर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि युवा पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी का कथा से सफर कब शुरू हुआ और कैसे वह इतने लोकप्रिय होते चले गए।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री स्वभाव से बड़े चंचल हैं। उनका हँसमुख चेहरा हर किसी को पसंद है। हालाकि उन्हें गुस्सा थोड़ा जल्दी आता है लेकिन वह अपनी वाणी से जनता को साधने का हुनर रखते हैं।
यह एक सामान्य परिवार से सम्बंध रखते हैं। इनका जन्म वर्ष 1996 में छतरपुर जिले में हुआ। इनके पिता का नाम रामकृपाल गर्ग और माता का नाम सरोज है। इनकी तीन संतानें हैं। धीरेंद्र शास्त्री का एक छोटा भाई है राम गर्ग और बहन रीता गर्ग। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से हुई और इसके बाद उन्होंने पास के गांव से ही हाईस्कूल और हायर सकेंड़ी की पढ़ाई पूरी की।
पढाई के समय से ही इनका झुकाव लोगों को कथा सुनाने में था। यह गांव के लोगों को ऐसे ही कथा सुनाया करते थे। वहीं साल 2009 में इन्होंने पहली बार गांव के पास ही पहली भागवत कथा सुनाई।
साल 2016 में इन्होंने प्राचीन मंदिर जिसमें भगवान शिव का ज्योर्तिलिंग है वहां वर्ष 2016 में गांववालों के सहयोग से यज्ञ का आयोजन किया। यहां मूर्ति की स्थापना की और यह बाघेश्वर धाम के नाम से विख्यात हुआ। आज हजारों की संख्या में लोग यहां दर्शन करने आते हैं और धीरेंद्र शास्त्री का दावा है कि वह लोगों कि प्रत्येक समस्या का निदान करते हैं।
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