वाराणसी, जंसा रोड हरदेवा गेट के सामने स्थित निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर द्वारा चोरी की डिग्री पर लाइसेंस लेने का मामला प्रकाश में आया है। जिस व्यक्ति के एमडी-रेडियोलाजिस्ट की डिग्री पर 12 जून 2020 से 11 फरवरी 2025 तक का लाइसेंस मिला है, वह मेरठ के रहने वाले हैं और फिलहाल कानपुर स्थित निजी हास्पिटल में कार्यरत हैं। इस मामले में सीएमओ से और पीसी-पीएनडीटी एक्ट में शिकायत की गई है।
शिकायत पत्र के मुताबिक अल्ट्रासाउंड सेंटर ने भुक्तभोगी के कागजात, पंजीकरण संख्या का दुरुपयोग किया है। डायग्नोस्टिक सेंटर से न तो कभी उनका संबंध रहा है और न ही वर्तमान में है। सेंटर में होने वाली जांच से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से जल्द से जल्द मामले में उचित कार्यवाई की गुहार लगाई है। दैनिक जागरण से बातचीत में भुक्तभोगी ने बताया कि जो व्यक्ति सेंटर का संचालन कर रहा है उससे उन्होंने फोन भी किया था। पहले तो उसने मुझसे जान-पहचान की बात कही। बाद में सख्ती करने पर किसी तीसरे व्यक्ति का नाम बताने लगा। वहीं निजी अल्ट्रासाउंड संचालक ने बताया कि डाक्टर से उनकी फोन पर ही बात हुई थी और सब कुछ तय हुआ था, अब वे अपनी बात से मुकर गए हैं।
जिले में चल रहा बड़ा रैकेट
एमडी-डायग्नोस्टिक की डिग्री का यह इकलौता मामला नहीं है। इस तरह के मामले पूर्व में मीरजापुर व चंदौली में भी सामने आ चुके हैं। ताजा प्रकरण सामने आने के बाद आशंका व्यक्त की जा रही है कि बनारस में भी ‘चोरी’ की डिग्री पर लाइसेंस का खेल शुरू हो गया है। प्रभारी सीएमओ डा. एके मौर्या ने बताया कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलती है तो जांच जरूर कराई जाएगी।
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