कथा वाचक मोरारी बापू ने धार्मिक नगरी अयोध्या में गणिकाओं को मंच के बगल बैठाकर अपनी कथा की शुरुआत, कही ये बड़ी बात

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अयोध्या । नौ दिवसीय रामकथा की शुरुआत करते हुए बापू ने कथा सत्र रामकथा से सबको तारने के आदर्श के अनुरूप गणिकाओं के लिए समर्पित किया। गणिकाओं (सेक्स वर्कर) के लिए अयोध्या के बड़ा भक्तमाल की बगिया में राम कथा सुना रहे मोरारी बापू ने दूसरे दिन उन्हें व्यास पीठ से 11 लाख रुपये देने की घोषणा की। यही नहीं, मोरारी बापू ने लोगों से उनकी मदद करने के लिए बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की।

मोरारी बापू ने कहा कि शनिवार तक जो लोग मदद के लिए आगे आना चाहें, वह आ सकते हैं क्योंकि समाज की मुख्यधारा में ये (सेक्स वर्कर्स) जुड़ें इसलिए इनकी मदद जरूरी है। उन्होंने कहा, गणिका गुरु हैं, समाज का शगुन भी हैं। बंगाल की प्रथा है कि दुर्गा मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी गणिका के घर से ही ली जाती है।

अप्सराएं भी स्वर्ग की गणिकाएं हैं। वे सोने के फ्रेम में मढ़ी हुई गणिकाएं है और ये मजबूरी झेल रही हैं। उन्होंने मानस गणिका के लिए अयोध्या का चयन करने का औचित्य प्रतिपादित किया। कहा, जो तारने वाली भूमि है, वहां गणिकाओं के लिए न आएं तो जाएं कहां। अपनी बात स्पष्ट करने के लिए बापू ने स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंग का भी मार्मिक विवेचन किया, जब विवेकानंद गणिका के गाए गीत से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें गणिका से दुराव की चूक का एहसास हुआ।

अद्वैत के उपासक संन्यासी और सीय राममय सब जग जानी के अनुरागी मानस के उपासकों के लिए भेद कैसा। मोरारी बापू ने कहा कि जो काम इल्मियों ने नहीं किया, वह काम फिल्मियों ने किया। अपना रुख स्पष्ट करते हुए बापू ने कहा, जो मरीज अत्यंत बीमार है और वैद्य के पास नहीं जा सकता, उसके लिए वैद्य का कर्तव्य बनता है कि वह उसके पास जाए और कम से कम मीठे बोल बोले। बापू ने कहा, मुझे अयोध्या पर भरोसा है यह ठाकुर की भूमि है और सबको तारने की ताकत रखती है।

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