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रिपोर्ट उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : युपी बिहार के सीमा से सटे कुशीनगर बाडर्र स्थित एेतिहासिक बांसी घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगने वाले ऐतिहासिक बांसी मेले की तैयारी जोर शोर पर है। नेता लोग भी श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था में लगे हुए हैं। परंतु बांसी नदी का क्या हाल है, यह किसी को भी चिंता नहीं है। लाखों श्रद्धालुओं को मुक्ति देने वाली बांसी नदी खुद ही शैवाल एवं कीचड़ से पटी है।
बांसी नदी पर लगने वाली कार्तिक पूर्णिमा का स्नान शुक्रवार के दिन है। परन्तु श्रद्धालुओं के स्नान करने वाला घाट गंदगी से पटी हुई है। स्नान के लिए कोई घाट सही नहीं है। प्रशासन की तरफ से बैरिकेटिंग भी नहीं किया गया है। जिसके कारण श्रद्धालुओं को दिक्कत हो सकती है । घाटों के सफाई के लिए अभी कोई सामाजिक कार्यकर्ता भी आगे नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन केवल मेला के डाक में लगी हुई हैं। परन्तु घाटों की चिंता नहीं है। गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन दूर दूर से आये लाखों श्रद्धालु बांसी नदी में स्नान कर दान पुण्य करते हैं।
इसके बिषय में एक कहावत है। सौ कासी ना एक बांसी।अर्थात सौ बार कासी में स्नान करने का फल मिलता है उतना एक बार बांसी में स्नान से मिलता है। लोगों की मान्यता है कि विवाह उपरान्त प्रभु श्रीराम माता जानकी सहित सभी बारातियों के साथ बांसी नदी के तट पर विश्राम किये थे। कार्तिक पूर्णिमा के दिन बांसी नदी में स्नान किये थे। तभी से हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिन बांसी नदी में स्नान कर अपने को धन्य समझते हैं।
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