कानपुर जॉली एलएलबी 2 फिल्म का वो दृश्य तो आपको याद ही होगा जिसमें प्रमोशन की लालच में इंस्पेक्टर सूर्यवीर सिंह एक निर्दोष को अपराधी बताकर मार देते हैं। ठीक उसी प्रकार मित्र होने का दंभ भरने वाली पुलिस 14 साल पहले भी ऐसा ही जघन्य कांड किया था। एनकाउंटर के नाम पर पुलिस ने गांव जहांगीराबाद निवासी संतन यादव की नृशंस हत्या कर दी थी। उस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत 15 पुलिस कर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें निलंबित किया गया था। पूर्व बीडीसी सदस्य विमल बाजपेयी उर्फ पप्पू की हत्या की घटना ने लोगों के जेहन में पुरानी घटना ताजा कर दी।
गांव जहांगीराबाद निवासी बराती लाल यादव का 15 वर्षीय पुत्र संतन आठ मई 2006 को गांव कटरा व भदरस के बीच मवेशी चरा रहा था। इसी दौरान पुलिस को गांव भदरस निवासी अपराधी राजू यादव व राजू कहार के भदरस व कटरा के बीच आशादेवी मंदिर पर मौजूद होने की सूचना मिली थी। तत्कालीन इंस्पेक्टर एमपी सलोनिया पुलिस बल के साथ पहुंचे और बदमाशों को ललकारा। इस पर राजू यादव व राजू कहार पुलिस टीम पर फायङ्क्षरग करके भाग निकले। पुलिस की जवाबी फायङ्क्षरग में मवेशी चरा रहे संतन यादव की मौत हो गई थी।
घटना के बाद पुलिस संतन को अपराधी और राजू यादव व राजू कहार का शागिर्द बताकर एनकाउंटर को जायज ठहराने की कोशिश करती रही, लेकिन सपा के तत्कालीन राज्यसभा सदस्य स्व. हरमोहन सिंह यादव के मोर्चा थामने के बाद अफसर बैकफुट में आ गए थे। इसके बाद मुठभेड़ में शामिल रहे इंस्पेक्टर एमपी सलोनिया के साथ ही पांच सब इंस्पेक्टर व नौ सिपाहियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। तत्कालीन एसएसपी ने आरोपित पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। हालांकि बाद में नामजद पुलिसकर्मियों व मृतक किशोर के स्वजन ने समझौता कर लिया था।
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