अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को हटाने के बाद पाकिस्तान के फैसलों से भारत के बजाय उसे ही ज्यादा नुकसान होने वाला है। कूटनीतिक जानकारों और पूर्व राजनयिकों का मानना है कि पाकिस्तान केवल अपने लोगों को दिखाने का प्रयास कर रहा है कि वह भारत के कदम के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। लेकिन सही स्थिति यह है कि ज्यादातर मामलों में इस फैसले से पाकिस्तान ही प्रभावित होगा।
पूर्व विदेश सचिव शशांक ने कहा कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के बाद पाकिस्तान सरकार ने ऐसा माहौल बनाया था जैसे उन्होंने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली है। उस वक्त उनको लग रहा था कि अफगानिस्तान उनके यहां बैठे तालिबान को मिलने वाला है और वे कश्मीर में भी अपना वर्चस्व बढ़ा लेंगे। उस दौरान उन्होंने अपने लोगों के *बीच जो अफवाह फैलाई थी उसका उलट हो गया।
जवाबी कार्रवाई संभव: पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान ने अपना उच्चायुक्त वापस बुलाया है तो हमें भी बुलाना होगा। यही अमूमन जवाबी कार्रवाई होती है। सलाह के लिए उच्चायुक्त को वापस बुलाना यही पहला कदम होता है।
भारत खुद समझौते की समीक्षा करने के पक्ष में: द्विपक्षीय समझौतों की समीक्षा करने के फैसले पर पूर्व विदेश सचिव ने कहा कि पाकिस्तान जिस तरह से आतंकवाद फैलाता है उसे देखते हुए भारत भी समय-समय पर समझौतों की समीक्षा करने की बात करता रहा है। हमारे यहां सिंधु जल समझौते की समीक्षा की मांग होती रही है। क्योंकि पाकिस्तान ज्यादातर समझौतों का फायदा उठाता रहा है।
व्यापार बहुत कम: शशांक ने कहा, द्विपक्षीय व्यापार दोनों देशों के बीच बहुत कम है। भारत ने अपनी तरफ से भी पुलवामा हमले के बाद कुछ प्रतिबंध लगाए थे। सर्वाधिक तरजीही देश का दर्जा भारत वापस ले चुका है। इसलिए इस कदम से भारत की बजाय पाकिस्तान को नुकसान होने वाला है।
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