नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राफेल डील मामले में जांच की मांग करने वाली पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश देने से भी इंकार कर दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने 14 दिसंबर 2018 को सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि हमें इस मामले में एफआईआर का आदेश देने या जांच बैठाने की जरूरत महसूस नहीं होती है।
इस मामले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है। राहुल ने ट्विट करते हुए कहा कि मामला खत्म नहीं हुआ बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जोसेफ ने राफेल स्कैम मामले में जांच के नए द्वार खोल दिए हैं। अब पूरी तरह एक नई जांच शुरू होनी चाहिए।
मामले की जांच के लिए एक जॉइंट पार्लियामेंटरी कमेटी (जेपीसी) का गठन भी होनी चाहिए। राहुल ने फैसले के उस हिस्से को भी ट्विटर पर शेयर किया है, जिसमें फैसला देने वाली तीन जजों की बेंच का हिस्सा जस्टिस जोसेफ ने लिखा है कि जांच एजेंसियां खुद इस मामले की जांच कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि राहुल राफेल मामले पर काफी मुखर रहे हैं।
वे लगातार कहते रहे हैं कि इस डील में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद का गलत इस्तेमाल कर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया है। ऐसे में मामले की जांच होनी चाहिए। मामला फ्रांस के साथ 36 लडाकू राफेल विमानों की डील से जुड़ा है। विपक्ष और कई संगठन लगातार कहते रहे हैं कि सरकार ने इसमें भारी घोटाला किया है।
उधर, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस मसले पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि निर्णय यह साबित करता है कि राफेल केस की आपराधिक जांच का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने खोल दिया है। बीजेपी के लिए यह समय जश्न का ढोल बजाने का नहीं बल्कि आपराधिक जांच पर आगे बढऩे का है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे हाथ संवैधानिक मर्यादा में बंधे हो सकते हैं, लेकिन अन्य किसी एजेंसी के साथ ऐसा नहीं है। अदालत ने कहा कि आर्टिकल 32 के तहत उनके पास बहुत सीमित अधिकार हैं।
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