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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : मोहर्रम का चांद दिखने के साथ ही इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। आज पहली मोहर्रम है। कर्बला के शहीदों को याद करते हुए या हुसैन की सदाएं गूंजने लगी। दसवीं मोहर्रम को शहीदों की याद में ताजिए का जुलूस निकाला जाएगा।
चांद दिखने के साथ ही सोगवारों ने काले कपड़े धारण कर सोग का इजहार किया। नवासए रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को कर्बला के मैदान में दसवी मोहर्रम को तीन दिनों तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद कर दिया गया था। रसूल के मानने वाले हर साल शहादत की याद मनाते हैं।
कुशीनगर जनपद में पडरौना के बसहिया बनवीरपुर निवासी मौलाना कमरुद्दीन कहते हैं कि रसूल की वफात के कुछ साल बाद ही अरब की सत्ता पर यजीद का कब्जा हो गया था। अपने कुकृत्यों पर शरीयत की मुहर लगाने के लिए उसने पैगम्बर के नवासे इमाम हुसैन से बैयत अर्थात समर्पण तलब किया।
इमाम जानते थे कि यजीद की बैयत करने से उनके नाना की सारी मेहनतें बेकार हो जाएंगी। सामंती सत्ता की दुबारा वापसी हो जाएगी।
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