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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जाति के नाम पर समाज को बाटने वाले लोग आगे चलकर सिर्फ अपने परिवार के लिए संपत्ति अर्जित करते हैं। ये लोग जाति का भी भला नहीं करते, समाज तो दूर की बात है।
ऐसे लोग जो जाति, क्षेत्र, भाषा और मजहब के नाम पर समाज को बाटकर अपना हित साधने के लिए आपके पास आएं तो उन्हें दो टूक शब्दों में जवाब दें कि आपको उनकी अलगाववादी नीतिया पसंद नहीं है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा को राष्ट्रधर्म से जोड़ा और कहा कि 2022 में जब भारत अपनी आजादी की हीरक जयंती मना रहा हो, उस समय हमें ऐसा भारत तैयार करना है जो आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, भ्रष्टाचार और अराजकता से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव होगा जब हमारी शिक्षा पद्धति में राष्ट्र धर्म को तरजीह दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों वाराणसी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री के साथ रहकर उनकी शिक्षा पद्धति को नजदीक से जानने का मौका मिला। प्रधानमंत्री भी मानते हैं कि शिक्षा में अनुशासन जरूरी है।
अनुशासन नहीं होगा तो दुशासन होगा। दुशासन होगा तो दुर्गति होनी तय है। राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से लेकर लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की शिक्षानीतियों और सिद्धातों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने छात्रों से सेहत पर भी ध्यान देने की सीख दी। उन्होंने कहा कि अगर आप स्वयं स्वस्थ नहीं हैं तो कोई भी साधन, वैभव और बल काम नहीं आएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों को नियमित समाचार पत्र पढ़ने की सीख देते हुए विशेष तौर पर संपादकीय पढ़ने को कहा। उन्होंने कहा कि इससे सीख मिलेगी, ज्ञान बढ़ेगा।
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