कांवड़ यात्रा: 1.12 लाख पेड़ों की कटाई का विवाद

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए 1.12 लाख पेड़ काटने का मामला: क्या है सच्चाई?

क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए एक नए मार्ग के निर्माण के लिए 1.12 लाख से ज़्यादा पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है? जी हाँ, आपने सही सुना! यह ख़बर सुनकर आपके होश उड़ गए होंगे, लेकिन यह सच्चाई है। इस लेख में हम इस विवादास्पद मुद्दे पर गहराई से चर्चा करेंगे और आपको पूरी जानकारी देंगे। यूपी सरकार के इस फैसले से पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश व्याप्त है और सोशल मीडिया पर #SaveTrees और #KanwarYatraDebate जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। क्या आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर क्या है इस पूरे मामले की सच्चाई और इस पर क्या है कानूनी पहलू?

कितने पेड़ काटे जा चुके हैं?

यूपी सरकार के पर्यावरण विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को बताया है कि अब तक 25,410 पेड़ों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से 17,607 पेड़ों की कटाई हो चुकी है। यह काम उत्तर प्रदेश वन निगम की देखरेख में किया गया। हालांकि, 9 अगस्त 2024 से पेड़ काटने का काम रोक दिया गया है। यह एक अहम सवाल है कि बाकी पेड़ कब और कैसे काटे जाएंगे? सरकार ने आश्वासन दिया है कि निर्धारित संख्या से ज़्यादा पेड़ नहीं काटे जाएंगे, लेकिन क्या यह आश्वासन पर्याप्त है? आने वाले समय में इस मुद्दे पर कई सवाल उठ सकते हैं।

पेड़ों की कटाई का विरोध

पेड़ों की कटाई के फैसले का व्यापक विरोध हो रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता और नागरिक समाज संगठन इस कदम की निंदा कर रहे हैं और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को भारी नुकसान होगा।

पेड़ों की गिनती कैसे हुई?

NGT ने यूपी सरकार से पेड़ों की सही संख्या बताने को कहा था। जवाब में बताया गया कि जहां कटाई पूरी हो चुकी है, वहां पेड़ों और झाड़ियों की गिनती संभव नहीं है, क्योंकि सफाई अभियान में झाड़ियां भी हटा दी गईं। यह जवाब कितना विश्वसनीय है, यह एक चिंता का विषय है। क्या पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया गया है?

पारदर्शिता का अभाव?

कई लोगों का मानना है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता का अभाव है। पेड़ों की संख्या को लेकर विरोधाभासी बयान आ रहे हैं और लोगों में संदेह बना हुआ है। सरकार को इस मामले में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता लाने की ज़रूरत है।

कितने पेड़ों की कटाई होगी?

सरकार ने साफ किया है कि परियोजना के तहत कुल 1,12,722 पेड़ों और पौधों की कटाई होगी, लेकिन इससे ज़्यादा नहीं। आगे, जब पीडब्ल्यूडी 15-20 मीटर चौड़े सड़क के नए रूट को फाइनल करेगा, तब बची हुई जगहों पर पेड़ों की गिनती और कटाई का काम किया जाएगा। लेकिन यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या वाकई इतने पेड़ों की कटाई आवश्यक है? क्या कोई और विकल्प नहीं खोजा जा सकता था?

विकल्पों की खोज

इस परियोजना में वैकल्पिक मार्गों की खोज पर गंभीर विचार होना चाहिए था। पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिए ऐसा रुट तलाशा जा सकता था जिसमे पेड़ों की कटाई कम से कम हो।

कानूनी अनुमति

यूपी सरकार ने बताया कि यह भूमि संरक्षित जंगल की श्रेणी में आती है और केंद्र सरकार से फ़रवरी 2023 में इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी ली गई थी। इसलिए इस पर यूपी ट्री एक्ट 1976 के तहत गिनती नहीं की गई। यह तर्क कितना जायज़ है, इस पर कानूनी विशेषज्ञों की राय आवश्यक है।

कानूनी चुनौतियाँ

यह संभव है कि इस मामले को लेकर कानूनी चुनौतियाँ सामने आए। पर्यावरण संरक्षण अधिनियमों और कानूनों के उल्लंघन के आरोपों से निपटना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

पेड़ों की परिभाषा क्या है?

परिवेश पोर्टल के अनुसार, पेड़ों को उनके घेराव (गर्थ) के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है – 0-30 सेमी, 31-60 सेमी और 150 सेमी से अधिक। इसमें छोटे पौधों और 30 सेमी से कम घेराव वाले पेड़ों को भी शामिल किया गया है। यह परिभाषा भी विवाद का विषय हो सकती है, क्योंकि छोटे पौधों की गणना को लेकर भी अलग-अलग राय हो सकती है।

पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव

पेड़ों की कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यह क्षेत्र की जैव विविधता को प्रभावित करेगा।

Take Away Points:

  • उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के लिए नए मार्ग के निर्माण के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटने की अनुमति देने का फैसला विवादों में घिरा हुआ है।
  • सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को बताया है कि 17,607 पेड़ काटे जा चुके हैं और कुल 1.12 लाख पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है।
  • पेड़ों की गिनती की विधि, पारदर्शिता की कमी, और पर्यावरण पर प्रभाव को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
  • इस मामले में आगे क्या होगा यह समय ही बताएगा, लेकिन यह एक बड़ा पर्यावरणीय मुद्दा है जिसे हल करने की आवश्यकता है।

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