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उपेन्द्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर : भगवान सूर्य और प्रकृति उपासना के महापर्व छठ की तैयारी पूरी हो गयी है। दो दिवसीय सूर्यषष्ठी छठ व्रत की शुरुआत 13(मंगलवार) से होगी। पर्व की पूर्व संध्या पर एक स्पताह पहले से ही नदी,तालाबों और पोखरों की साफ-सफाई के साथ ही बेदी बनाने का काम शुरू हो गया। रबिवार से नहाय-खाय के साथ ही छठ पूजा शुरू हो चुकी है।
मंगलवार को खरना (उपवास) होगा। मंगलवार की शाम व्रती घाटों पर पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगे। वहीं,बुधवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती पारण करेंगे। कार्तिक शुक्ल पंतमी में होने वाले लोक आस्था के सूर्यषष्ठी व्रत को लेकर कुशीनगर जनपद के पडरौना शहर के आलावा गांव में खासा उत्साह है।
इस पर्व में भगवान सूर्य की उपासना और अर्घ्य देने का नियम है। प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक छठी मैया और भगवान सूर्य करीबी सम्बंधी हैं। इसलिए छठी मैया के साथ ही भगवान भाष्कर की पूजा-अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अराधना करता है, उनकी संतानों की रक्षा छठी मैया करती हैं। इस व्रत का वैज्ञानिक आधार भी है। बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ ही पुरुष भी छठ का निर्जला व्रत रखते हैं।
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