नवजात शिशु त्याग: एक बढ़ती हुई चिंता

नवजात शिशु त्याग: एक बढ़ती हुई चिंता

क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल हजारों नवजात शिशुओं को त्याग दिया जाता है? यह एक भयावह सच्चाई है जो हमारे समाज की गहरी समस्याओं की ओर इशारा करती है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और गाजियाबाद में हुई घटनाएँ इस कठोर सच्चाई को फिर से सामने लाती हैं, जहाँ सड़क किनारे और झाड़ियों में नवजात शिशुओं को अकेला छोड़ दिया गया। यह लेख इस बढ़ते हुए मुद्दे पर प्रकाश डालता है और इसके पीछे के कारणों की पड़ताल करता है।

गोरखपुर की घटना: एक दिल दहला देने वाली कहानी

गोरखपुर में, एक नवजात बच्ची को कड़ाके की ठंड में सड़क किनारे अकेला पाया गया। बच्ची के रोने की आवाज़ ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा, जिन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। बच्ची को बाल देखभाल केंद्र भेज दिया गया, जहाँ उसे समुचित चिकित्सा देखभाल मिली। यह घटना एक बार फिर हमारे समाज के उस अंधेरे पक्ष को दिखाती है जहाँ मां अपनी संतान को त्यागने को मजबूर होती है। ऐसे परिदृश्य को देखते हुए, सवाल यह उठता है कि क्या हमारे समाज में ऐसे कदम उठाने की आवश्यकता नहीं है जिससे महिलाओं को संतान पालन के प्रति विश्वास और सहयोग मिले?

गाजियाबाद की घटना: एक समान दुखद कहानी

गाजियाबाद में भी, एक समान घटना सामने आई, जहाँ एक नवजात बच्ची झाड़ियों में लावारिस हालत में पाई गई। बच्ची के रोने की आवाज़ सुनकर लोगों ने उसे ढूंढा और पुलिस को सूचित किया। ये दोनों घटनाएँ हमें इस गंभीर मुद्दे के प्रति जागरूक करती हैं और सरकार और समाज दोनों से प्रभावी समाधान की मांग करती हैं। ऐसे दुखद परिणामों से बचने के लिए हमें गहराई से इस समस्या के मूल कारणों को समझना होगा।

नवजात शिशु त्याग के पीछे के कारण

कई कारण हैं जिनसे नवजात शिशु त्याग की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इनमें से कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • गैर-विवाहित माताएँ: अक्सर गैर-विवाहित महिलाएँ समाज के दबाव और कलंक के डर से अपने बच्चे को त्याग देती हैं।
  • गरीबी और बेरोज़गारी: आर्थिक तंगी के कारण, कुछ माताएँ अपने बच्चे को पालने में असमर्थ होती हैं और उन्हें त्यागने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
  • अनचाहे गर्भधारण: अनचाही गर्भावस्था के कारण, कई महिलाएँ गर्भपात या अपने बच्चे को त्यागने का विकल्प चुनती हैं।
  • अज्ञानता और जागरूकता की कमी: परिवार नियोजन और माता-पिता बनने के प्रति समुचित जानकारी की कमी से भी इस समस्या को बढ़ावा मिलता है।

इस समस्या का समाधान

इस बढ़ती हुई समस्या को दूर करने के लिए, हमें बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा। इसमें निम्नलिखित उपाय शामिल हो सकते हैं:

  • जागरूकता अभियान: समाज में जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है, ताकि लोग इस मुद्दे के प्रति संवेदनशील हों।
  • महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने में मदद करेगा।
  • परिवार नियोजन सेवाएँ: परिवार नियोजन और यौन स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुँच सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • राष्ट्रीय मददलाइन: एक प्रभावी राष्ट्रीय मददलाइन शुरू की जानी चाहिए जहाँ महिलाएँ अपनी समस्याएँ साझा कर सकें और सहायता प्राप्त कर सकें।
  • बाल संरक्षण केंद्रों में सुधार: बाल संरक्षण केंद्रों में बच्चों की देखभाल और पुनर्वास प्रक्रिया को बेहतर बनाना चाहिए।

टेक अवे पॉइंट्स

  • नवजात शिशुओं का त्याग एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • इस समस्या के समाधान के लिए, हमें महिला सशक्तिकरण, जागरूकता अभियान और सरकारी सहायता पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
  • हर बच्चे को प्यार, देखभाल और सुरक्षित वातावरण का अधिकार है। आइए मिलकर एक बेहतर समाज का निर्माण करें।

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