बाराबंकी घूसकांड : कप्तान डॉ. सतीश कुमार निलंबित होंगे, निर्वाचन आयोग से मांगी इजाजत

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बाराबंकी। साइबर क्राइम सेल प्रभारी अनूप कुमार यादव की विवेचना में 65 लाख की वसूली मामले में एसपी ऑफिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी मुख्यालय द्वारा करवाई गई जांच में एसपी बाराबंकी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। इसके अलावा डीजीपी मुख्यालय ने यह भी पाया है कि धोखाधड़ी के मामले में निजी कंपनी पर की गई कार्रवाई में एसपी बाराबंकी का सुपरविजन काफी कमजोर था।  अब राज्य सरकार ने एसपी डॉ. सतीश कुमार को निलंबित करने और नए कप्तान की नियुक्ति के लिए निर्वाचन आयोग से इजाजत मांगी है।

वसूली के मामले में अनूप को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि बाराबंकी में विश्वास ट्रेडिंग कंपनी से 65 लाख रुपये वसूले जाने के मामले में जिले की पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे।

आरोप है कि कंपनी के लोगों को एसपी के दफ्तर में बुलाकर धमकाया गया। डॉ. सतीश के इस मामले में ढिलाई बरतने की भी बात सामने आई। आला पुलिस अधिकारियों ने उनसे सवाल किए तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वेंकटेश्वर लू ने एसपी बाराबंकी के निलंबन का प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव केंद्रीय चुनाव आयोग को भेज दिया गया है।

डीजीपी ओपी सिंह ने प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार को एसपी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव सौंपा था। गृह विभाग से यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय के पास भेजा गया। प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने सहमति जता दी है।

विश्वास ट्रेडिंग कंपनी के शंकर गायन ने लखनऊ में हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कर साइबर क्राइम सेल के प्रभारी अनूप कुमार यादव व उसके साथियों पर 65 लाख रुपये की वसूली का आरोप लगाया था।

आरोप था कि अनूप ने कंपनी के प्रसनजीत सरदार, शंकर गायन और धीरज श्रीवास्तव को कंपनी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले की जांच के बहाने दस्तावेज के साथ 10 जनवरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बुलाया

वहां से अपने आवास ले जाकर 65 लाख की मांग के साथ कंपनी बंद कराने की धमकी दी। उन्होंने डर के चलते 65 लाख दे दिए। अनूप ने 11 जनवरी को फिर बुलाया और जेल भेज दिया।

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