सीमैप लखनऊ के परिसर में औषधीय पौधों की खेती कैसे की जाती है, इसके विषय में एक कार्यक्रम रखा गया। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के कई किसानों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय और सगंध पौधों के उत्पादन, प्रसंस्करण और प्रबंधन विषय पर एक्सपोजर और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
परियोजनाओं के बारे में दी गई जानकारी
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान के निदेशक डॉक्टर जे. वी. शर्मा ने सीमैप के वैज्ञानिकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान किसानों और पर्यावरण के लिए काफी महत्वपूर्ण काम कर रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने टेरी द्वारा किये जा रहे विभिन्न परियोजनाओं तथा उनकी गतिविधियों के बारे में भी बताया।
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जलभराव में लगाएं ये पौधे
सीमैप के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि औषधीय एवं सगंध पौधे सूखे एवं जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी लाभकारी हैं। इन पौधों को अपने फसल चक्र में शामिल कर किसान अतिरिक्त लाभ ले सकते हैं।
मिंट की खेती के लिए जानकारी
कार्यक्रम में डॉ.सौदान सिंह ने मिंट की खेती और नर्सरी विधियों पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत से मिंट का बड़े स्तर पर निर्यात भी किया जाता है। यह काफी आर्थिक लाभ पहुंचाने वाली खेती होती है।
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