नई दिल्ली। राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार को फीस बढ़ोतरी के खिलाफं प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। नकाबपोश बदमाशों ने प्रदर्शनकारी छात्रों को डंडे और लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा। वे करीब 3 घंटे तक कैंपस में कोहराम मचाते रहे। हमले में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 20 लोग घायल हो गए।
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JNU कुलपति ने कहा कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। जेएनयू परिसर में हुई हिंसा आंदोलन कर रहे छात्रों के हिंसक होने के बाद हुई।
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ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हमले की निंदा की। मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, “जेएनयू में हुए हमले, हिंसा के बारे में जानकर हैरान हूं। लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है और छात्रों पर इस तरह के हमलों की स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए। कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अपील है कि दोषियों को पकड़ने के लिए शीघ्र कार्रवाई करें और घायल छात्रों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
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जेएनयू प्रशासन ने हिंसा मामले की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को भेज दी है। जेएनयू के वाइस चांसलर एम. जगदीश कुमार ने छात्रों से शांति की अपील करते हुए कहा कि हम यकीन दिलाते हैं कि रजिस्ट्रेशन नहीं रुकेगा।
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एम्स ने बयान जारी कर कहा कि जो 34 छात्र भर्ती थे, सभी को डिस्चार्ज कर दिया गया है।
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पुलिस को मिली मारपीट की कई शिकायतें, दर्ज की एफआईआर।
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सोमवार सुबह मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया, कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुए प्रदर्शन।
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अस्पताल में भर्ती घायल छात्र किए जा रहे हैं डिस्चार्ज।
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सरकार ने विश्वविद्यालय प्रशासन को तलब किया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव ने जेएनयू के रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर और रेक्टर को बुलाया ऑफिस।
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दिल्ली पुलिस की जॉइंट सीपी शालिनी सिंह को सौंपी गई हिंसा की जांच की जिम्मेदारी।
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जेएनयू टीचर एसोसिएशन ने की छात्रों से उकसावे से दूर रहने की अपील।
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