ममता ने खोला भाजपा के खिलाफ मोर्चा, पूरा विपक्ष उनके साथ दिखा

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नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव छह चरणों के बाद अब जबकि सातवें और अंतिम चरण का चुनाव शेष रह गया है, तो ऐसे माहौल में ममता बनर्जी एक बार फिर विपक्ष के बीच सशक्त नेता के बतौर उभर कर सामने आ रही हैं।

आम चुनाव की अधिसूचना से पहले 19 जनवरी को कोलकाता में हुई विपक्ष की महारैली को याद कीजिए, जब भाजपा के विरोध में ममता के बुलावे पर करीब 17 राजनीतिक दल एक मंच पर इकट्ठा हुए थे। पीएम मोदी और शाह से सीधे भिड़ने वाली ममता पिछले कुछ दिनों में और ज्यादा आक्रामक नजर आई हैं। साल 2012 में टाइम मैगजीन की ओर से दुनिया के 100 प्रभावशाली व्यक्तित्व में शामिल रहीं ममता बनर्जी सशक्त होतीं दिख रही हैं।पश्चिम बंगाल में पहले चरण के चुनाव से लेकर छठे चरण के चुनाव तक बंपर वोटिंग हुई, लेकिन इस दौरान हिंसा की भी खूब घटनाएं हुईं।

राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और समर्थक खून-खराबे पर उतर आए। इन सब घटनाओं के बीच चुनाव प्रचार अभियान, रैलियों और जनसभाओं में जो सबसे कॉमन बात दिखी, वह यह कि बंगाल में ज्यादा से ज्यादा कमल खिलाने के उद्देश्य में लगी भाजपा, टीएमसी प्रमुख और सीएम ममता बनर्जी पर हमलावर रही, वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी भी पीएम मोदी और अमित शाह के जुबानी हमलों पर पलटवार करती रहीं। पश्चिम बंगाल में हिंसा की खबरें तो लगातार आती रहीं, ।

लेकिन कोलकाता में मंगलवार को अमित शाह की रोड शो के दौरान हुई हिंसा ने सियासी आग को और हवा दे दी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य चुनाव आयोग पर ममता के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए ललकारा तो बुधवार की शाम तक चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई सामने आई।

आयोग ने बंगाल में चुनाव प्रचार की समय सीमा कम कर दी और गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य अधिकारियों को पद से हटा दिया। इसके बाद ममता आक्रामक हुईं तो चुनाव आयोग को पीएम मोदी और शाह के इशारे पर काम करनेवाला बता दिया। ममता ने इस फैसले का विरोध किया तो पूरा विपक्ष उसके साथ खड़ा हो गया।

बसपा प्रमुख मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश, आप प्रमुख और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, टीडीपी प्रमुख और आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने ममता का समर्थन किया है। यहां तक कि कांग्रेस और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी इस मामले पर ममता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

ममता बनर्जी अचानक इतनी मजबूत नहीं हुई हैं। उनके सशक्तीकरण के पीछे उनका लंबा इतिहास रहा है। उनके बचपन से लेकर उनकी पढ़ाई-लिखाई और फिर राजनीति में पदार्पण से लेकर अपनी सियासी जमीन तैयार करने तक वह एक सशक्त नेता के तौर पर उभरी हैं।

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