बुजुर्गों ने सच कहा है, झूठ के पांव नहीं होते, उसकी उम्र छोटी होती है, ये कहावत चरित्रार्थ हो गई। दहेज के लिए ज्योति की हत्या में जेल गए एक ही परिवार के चार सदस्यों को आखिर पुलिस ने जेल से रिहा करा ही दिया। उनके जेल से बाहर आते ही गांव के ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। अपनों को देखकर सभी के चेहरे खिल उठे। गांव तेहरा में भी जश्न का माहौल है। यह मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का है।
अतरौली के गांव कदौली में 14 जून को उस वक्त पुष्पेंद्र के परिवार पर पहाड़ टूटा जब गांव के नजदीक कुएं से एक युवती का शव निकला। परिजनों ने उसकी शिनाख्त अपनी बेटी व पुष्पेंद्र की पत्नी ज्योति के रूप में कर ली। पिता भीमसेन ने ससुरालियों पर दहेज के लिए ज्योति की हत्या करके शव कुएं में फेंकने काआरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करादिया और पुलिस ने भी इसे सच मानते हुए पुष्पेंद्र, उसकी मां राजवती, पिता गंगा सिंह और बड़े भाई चंद्रभान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। उस वक्त भी पुष्पेंद्र के परिजनों ने कहा था कि ज्योति किसी लड़के साथ घर से गई है, लेकिन मायका पक्ष ने उनकी एक न सुनी। पुलिस ने भी उनकी कही को महज झूठ माना।
शुक्रवार को पुलिस ने दहेज हत्या में परिवार के चारों सदस्यों को तीन महीने बाद जब पुलिस ने रिहा करा दिया। हालांकि चारों की रिहाई गुरुवार को ही होना थाी लेकिन तकनीकी खामियों के चलते एक दिन टल गई। चारों के जेल से बाहर आते ही गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने परिवार व रिश्तेदारों के साथ स्वागत किया। अपनों को देखकर परिवार के लोगों के चेहरे खिल उठे।
नातिनी को देख छलकी राजवती की आंखें
जेल से रिहा होकर अपने गांव तेहरा आयीं राजवती अपनी बहू ज्योति और उनके परिजनों से नाराज है लेकिन अपनी नातिन विशाखा और कोमल से उसे कोई गिला नहीं। दोनों को देखते ही दादी ने गले लगा लिया। तीन माह बाद बच्चियों को देखते ही परिवार के सभी सदस्यों की आंखें छलक उठी। जीवित बहू ज्योति की दहेज के लिए हत्या के आरोप में जेल से ससम्मान रिहा होकर वापस आए परिजनों ने अब ज्योति के परिजनों को सबक सिखाने की तैयारी कर ली है। परिजनों का कहना है कि जिस अपमान से हम गुजरे हैं उसे तो जिंदगी भर नहीं भूल सकते, लेकिन कोई दोबारा ऐसा न करे इसके लिए झूठा मुकदमा लिखाने वालों को सबक सिखाना जरूरी है।
मां के साये से दूर रहेगी दोनों बेटियां
घर की दहलीज लांघ चुकी ज्योति को ससुराली जन अपनाने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि ज्योति ने अपने परिजनों के साथ मिलकर पूरे परिवार को बर्बाद करने की साजिश रची थी, उसे माफ नहीं किया जा सकता। लेकिन दोनों बेटियों को अपने साथ रखेंगे। हापुड़ से जिंदा बरामद हुई ज्योति फिलहाल अपने पिता के घर गांव विधीपुर में रह रही है। पुष्पेन्द्र सिंह निवासी तेहरा की ससुराल में सन्नाटा पसरा हुआ है। भीमसेन का कहना है कि बेटी गायब होने के बीच इसी गांव कदौली में सड़ी गली लाश मिलने के कारण पैर की एक उंगली बड़ी देखकर ज्योति के रूप में शिनाख्त कर दी थी मगर पुलिस ने जो कार्यवाही अब की है उसी समय कर ली जाती तो ज्योति के ससुरालियों को जेल जाना नहीं पड़ता। इसका हमें भी दुख है।
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