नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में पुलिस कार्रवाई को लेकर मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्ष ने छात्रों पर रविवार को हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में न्यायिक जांच की मांग की। सोनिया ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कहा कि पूर्वोत्तर में जो हालात हैं वह अब पूरे देश में फैल रहा है। यह अब जामिया विश्वविद्यालय तक भी आ गया है।
यह काफी गंभीर हालात हैं। आशंका है कि ऐसी स्थितियां आगे और बढ़ सकती हैं। पुलिस सही तरीके से मामले को नियंत्रित नहीं कर पा रही है। पुलिस जामिया के महिला हॉस्टल में घुसी और बच्चियों को जबरदस्ती बाहर निकाला। आपने भी देखा है कि मोदी सरकार और भाजपा सिर्फ लोगों की आवाज दबाने आई है। हम यह स्वीकार नहीं कर सकते। सरकार का यह रवैया बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 14-15 राजनीतिक दलों के सदस्यों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। हमनें सबकी तरफ से ज्ञापन दिया है। हमनें लिखा है कि सरकार इस बिल को लेकर काफी जल्दी में थी। सरकार को उनके सलाहकार ने मना भी किया था कि वह इस कानून को पास न कराए। राजनीतिक पार्टियों ने भी उन्हें आगाह किया था।
इस कानून की वजह से छात्रों पर अत्याचार हो रहा है। पुलिस देश की सरकार हो गई है। इस मौके पर टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, माकपा नेता सीताराम येचुरी, समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता मनोज झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
शाह ने लगाया विपक्षी दलों पर यह आरोप
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों पर लोगों को भडक़ाने का आरोप लगाया है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पूरा विपक्ष ही लोगों के बीच भ्रम फैलाने में जुटा है। नागरिकता कानून का मतलब अल्पसंख्यक वर्ग के किसी भी व्यक्ति से नागरिकता वापस लेना नहीं है। बिल में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है।
वर्ष 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था, जिसका एक हिस्सा एक-दूसरे देश के अल्पसंख्यकों की रक्षा करना था। इस पर बीते 70 सालों से काम नहीं किया गया क्योंकि कांग्रेस वोट बैंक बनाना चाहती थी। हमने इस समझौते को सही ढंग से लागू किया है और लाखों लोगों को नागरिकता देने का फैसला किया है, जो पिछले कई सालों से इंतजार में थे।
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