पति 25 लाख लेकर BJP में शामिल, AAP पार्षद पत्नी को करोड़ों का प्रस्ताव, लेना पड़ा तलाक

सूरत। गुजरात के सूरत में सियासी मतभेद के चलते एक युवा इंजिनियर जोड़े का तलाक हो गया।पत्नी आम आदमी पार्टी (आप) की नगर पार्षद है। सूरत महानगर पालिका में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने वाली रीता दुधागरा ने पत्रकारों को बताया कि उसके पति 25 लाख रुपये लेकर भाजपा में शामिल हुए हैं, वह अब उस पर भी तीन करोड़ रुपये लेकर भाजपा में शामिल होने का दबाव डाल रहा है। रीता ने बताया कि पति की हरकतों से परेशान होकर वह कुछ समय पहले ही अपने पति से अलग हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उसका पूर्व पति उस पर भाजपा में शामिल होने का दबाव डाल रहा है।

 इस जोड़े ने हाल ही में आपसी समझ से तलाक लिया। 26 वर्षीय अब पति चिराग (28) के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाश रही हैं, ताकि उनके निजी सामान जैसे स्कूल और कॉलेज की मार्कशीट, पहचान दस्तावेज, उनकी पार्षद से संबंधित दस्तावेज, उनकी मोपेड और लैपटॉप सहित अन्य कीमती सामान ले सकें।

इंफर्मेशन टेक्नॉलजी इंजिनियर ने बताया,  मेरे पति पिछले कुछ महीनों से बेरोजगार थे, इसलिए मैंने उन्हें 7 लाख रुपये का भुगतान किया और उन्होंने मेरे 90 ग्राम से अधिक वजन के सोना ले लिया। मैं मानती हूं कि नकद भुगतान सेपरेशन के लिए था, लेकिन अब मैं अब मेरे दस्तावेजों को लेने के लिए कानूनी विकल्प तलाश रही हूं। 

दुधागरा को 54,754 वोट मिले और उन्होंने फरवरी में वार्ड 3, सरथाना-सिमाडा से बीजेपी उम्मीदवार को हराया। उन्होंने कहा, ‘मेरा कोई राजनीतिक अनुभव नहीं था, लेकिन आप के साथ कल्याणकारी गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे नगरपालिका चुनाव में टिकट की पेशकश की और मैं सबसे अधिक अंतर से जीती। उन्होंने बताया कि उनकी शादी तीन साल पहले एक कंप्यूटर इंजिनियर चिराग से की थी। दंपती के कोई संतान नहीं है। 

रुता ने कहा, ‘मेरे पति के साथ मेरे एक साल से अधिक समय से मतभेद थे, लेकिन हम किसी तरह अडजस्ट कर रहे थे। लेकिन मेरी जीत के कुछ हफ्तों के भीतर ही मेरे पति ने मुझ पर बीजेपी में शामिल होने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्हें इसके लिए करोड़ों का प्रस्ताव मिला होगा, लेकिन मैं आम आदमी पार्टी छोड़ने नहीं जा रही हूं। 

पार्षद ने बताया, इस विवाद में अप्रैल में मुझे चिराग ने भी पीटा था जिसके बाद मैंने अलग होने का फैसला किया। वह अब भी मुझे धमकियां दे रहा है और मेरे दस्तावेज भी वापस नहीं किए। इसलिए, मैं अब कानूनी विकल्प तलाश रही हूं। AAP ने शहर के पाटीदार बहुल इलाकों में भाजपा के 93 के मुकाबले 27 सीटें जीती थीं।

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