झारखंड विधानसभा चुनावों के नतीजे आ गए हैं और एक बड़ा सवाल सबके जेहन में है: झारखंड में सत्ता की बागडोर कौन संभालेगा? चुनावी नतीजों के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इसी की चर्चाएँ तेज हो गई हैं। जेएमएम के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने 56 सीटों पर जीत हासिल कर ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है, लेकिन अब सरकार बनाने की राह में कुछ रोड़े भी दिखाई दे रहे हैं। क्या झारखंड में कांग्रेस को जम्मू-कश्मीर जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा? आइए, इस सवाल का जवाब ढूँढ़ते हैं।
झारखंड में सरकार गठन की राजनीति: क्या है समीकरण?
झारखंड में सरकार बनाने के लिए 41 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करना ज़रूरी है। जेएमएम के पास 34 सीटें हैं, कांग्रेस के 16 विधायक हैं, RJD के 4 और CPI(ML) के 2 विधायक जीतकर आए हैं। इस हिसाब से इंडिया ब्लॉक के पास कुल 56 सीटें हैं जो बहुमत से काफी आगे है। लेकिन, यहीं से शुरू होती हैं राजनीतिक रस्साकशी। कांग्रेस ने शुरू में उपमुख्यमंत्री पद की मांग की थी, जो जेएमएम ने ठुकरा दिया। अब बात चार मंत्रालयों पर आकर अटक गई है। यहीं से सवाल उठता है: क्या कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर कमज़ोर हो रही है? क्या उसे जम्मू-कश्मीर जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा, जहाँ उसने सरकार में शामिल होने के बजाय समर्थन देने का रास्ता चुना था?
कांग्रेस की चिंता: क्या है जम्मू-कश्मीर का सबक?
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अकेले ही सरकार बना ली, कांग्रेस की ज़रूरत महसूस किए बिना। नेशनल कान्फ्रेंस को सिर्फ 42 सीटें मिली थी, लेकिन अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर उनका आंकड़ा 48 हो गया था। कांग्रेस के पास सिर्फ 6 विधायक थे, इस वजह से कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर बहुत कम हो गयी थी।
क्या झारखंड में भी दोहराया जाएगा जम्मू-कश्मीर का इतिहास?
झारखंड में भी यही आशंका दिखाई दे रही है। जेएमएम के पास 34 विधायक हैं जो जादुई आंकड़े के करीब हैं। कांग्रेस के विधायक ज़रूर सरकार में हिस्सा बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी बार्गेनिंग पावर को देखते हुए उनको मनचाही जगह न मिलने की संभावना बढ़ गई है। ऐसे में यह बिल्कुल मुमकिन है की कांग्रेस की तरह जम्मू कश्मीर वाली स्थिति यहां भी देखने को मिले।
झारखंड में कौन सी पार्टी कितनी मजबूत?
झारखंड विधानसभा में जेएमएम सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन उसकी सीटों की संख्या जेएमएम से काफी कम है। RJD और CPI(ML) छोटी पार्टियाँ हैं, जिनका प्रभाव सीमित है। इसलिए, सरकार गठन में जेएमएम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और वो कांग्रेस को कितना महत्व देती है, यही सबसे बड़ा सवाल है।
सहयोगी दलों की भूमिका क्या होगी?
RJD और CPI(ML) की भूमिका भी अहम है। वे जेएमएम के साथ मिलकर सरकार बना सकती हैं, लेकिन उनकी अपनी शर्तें भी हो सकती हैं। ये सभी पार्टियां आपस में तालमेल बिठाकर सरकार बनाने की कोशिश करेंगी, नहीं तो स्थिति और भी जटिल हो सकती है।
आगे क्या?
झारखंड में सरकार गठन का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में जेएमएम और कांग्रेस के बीच बातचीत का दौर जारी रहेगा, और कई तरह के समझौते हो सकते हैं। हालाँकि, कांग्रेस के लिए यह तय करना बेहद जरुरी होगा की सरकार के अंदर रहना है या बाहर से समर्थन करना।
Take Away Points:
- झारखंड में जेएमएम के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने चुनावों में जीत हासिल की है।
- सरकार गठन के लिए जेएमएम और कांग्रेस के बीच वार्ता जारी है।
- कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
- जम्मू-कश्मीर जैसी स्थिति के झारखंड में भी बनने की आशंका है।
- आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

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