वीर सैनिकों ने निभाई पिता की भूमिका, भावुक कहानी

सैनिक का दुखद अंत, साथियों ने निभाई पिता की भूमिका: एक भावुक कहानी

यह कहानी उत्तर प्रदेश के मथुरा की है, जहाँ एक सैनिक की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई, और उसकी बेटी की शादी से ठीक दो दिन पहले। लेकिन, यहाँ पर एक अनोखी कहानी सामने आई है, एक कहानी जो देशभक्ति, साथी भावना, और मानवीय संवेदना से भरी है। इस घटना में, सैनिक के साथी जवानों ने उनकी बेटी का कन्यादान कर, पिता का फर्ज़ अदा किया, जिससे शादी की रस्म बिना किसी बाधा के पूरी हो सकी।

देवेंद्र सिंह की आखिरी यात्रा

48 वर्षीय देवेंद्र सिंह, मथुरा के बकला गांव के निवासी थे। 7 दिसंबर को उनकी बेटी की शादी थी। शादी की तैयारियों में जुटे देवेंद्र 5 दिसंबर को एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। यह घटना शादी की खुशी को मातम में बदल गई। उनकी बेटी का दुःख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उसके पिता की मौत के ग़म में उसने शादी करने से ही मना कर दिया।

सैनिक साथियों का अनोखा कदम

देवेंद्र के परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा। अब शादी में सबसे बड़ी समस्या कन्यादान की थी। देवेंद्र की जाट बटालियन के वीर सैनिकों ने उनकी मृत्यु का समाचार पाते ही तुरंत कार्रवाई की. उनके कमांडिंग अधिकारी के निर्देश पर पांच सैनिक, सूबेदार सोनवीर सिंह, सूबेदार मुकेश कुमार, हवलदार प्रेमवीर, विनोद और बेताल सिंह बकला गांव पहुंचे. उन्होंने नहीं सिर्फ़ कन्यादान किया, बल्कि शादी की अन्य तैयारियों में भी पूरी मदद की, जिससे दुल्हन को उसके दुख में सहारा मिला।

देशभक्ति और साथी भावना की मिसाल

यह घटना सैनिकों की साथी भावना और देशभक्ति की एक अनोखी मिसाल है। ये सैनिक केवल कर्तव्य ही नहीं निभा रहे थे, बल्कि वो उस परिवार के साथ एक ऐसी मानवीयता दिखा रहे थे, जिससे सबका दिल छू गया. इस घटना ने हमें यह याद दिलाया कि सिर्फ़ लड़ाई ही नहीं, मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बनना भी हमारी सेना का मूल मंत्र है। उनके इस काम की जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

समाज के लिए प्रेरणादायी

देवेंद्र के साथी सैनिकों के द्वारा किये गए कर्म ने समाज के लिए भी एक प्रेरणा दी है। यह दिखाता है कि दुःख की घड़ी में भी हम मानवता का दर्शन कर सकते हैं। उनकी भावना ने दिलों में एक नई आशा जगाई। इस घटना ने साबित किया कि सेना के जवान सिर्फ़ युद्धक्षेत्र में ही नहीं, अपितु अन्य दुखद स्थितियों में भी एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं।

Take Away Points

  • सैनिक साथियों ने दुःख की घड़ी में महान मानवीयता दिखाई।
  • उनकी साथी भावना और देशभक्ति सभी के लिए प्रेरणादायक है।
  • इस घटना ने हमें मानवीयता और सहानुभूति का पाठ पढ़ाया।

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