विश्व हिंदू परिषद ने 52 सालों में पहली बार अपने अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए चुनाव करवाया। इस पद के लिए दो उम्मीदवार मैदान में थे और परिषद के सदस्यों में किसी एक के नाम पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद चुनाव कराने का फैसला किया गया था। तोगड़िया ने राघव रेड्डी का समर्थन किया था जो अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपनी लगातार तीसरी पारी के लिए चुनाव में खड़े थे। इनके मुकाबले में हिमाचल प्रदेश के पूर्व गवर्नर और एमपी हाईकोर्ट के पूर्व जज विष्णु सदाशिव कोकजे मैदान में खड़े थे।
वीएचपी में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष को परिषद के सदस्य मतदान की प्रक्रिया से चुनते हैं जबकि अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का चयन निर्वाचित अध्यक्ष करता है। रेड्डी ने दोनों बार तोगड़िया को चुना था। पिछले साल दिसंबर में भुवनेश्वर में हुई बैठक में जब आरएसएस के एक धड़े ने कोकजे का नाम सुझाया तो तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध किया था। इससे पहले तोगड़िया ने कोकजे की उम्मीदवारी पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि वह रेड्डी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘रेड्डी युवा हैं, हिंदुत्व के लिए समर्पित हैं और उन्हें अशोक सिंघल ने चुना है। अगर कोकजे चुने जाते हैं तो यह तय है कि मैं कैबिनेट में नहीं रहूंगा।
उन्होंने आगे कहा था, ‘यह चौंकाने वाला है कि जो व्यक्ति एक संवैधानिक पद पर रह चुका है वह एक सामाजिक-धार्मिक संगठन के चुनाव में खड़ा हो रहा है। वह 20 साल पहले पद से रिटायर हुए और उन्होंने हिंदुत्व के लिए कभी कुछ नहीं किया। फिर वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
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