बाल रंगोली प्रतियोगिता में द इंडियन पब्लिक स्कूल रहा अव्वल , विद्या मंदिर गर्ल्स को मिला तीसरा पुरस्कार

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लोक कला संग्रहालय के शैक्षिक कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार 3 मार्च को संग्रहालय परिसर में बाल रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न स्कूलों के दर्जनों बच्चों ने उत्साह के साथ सतरंगी और प्रेरक रंगोलियां बनायीं। इसमें विभिन्न स्कूलों के 45 छात्र-छात्रओं ने रंगोली डस्ट, फूल आदि से अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।

इसके साथ ही 3 सांत्वना पुरस्कार भी वितरित किये गए। प्रतिभागी बच्चों को कलर पेंसिल, वैक्स कलर, स्केच पेन और पेंसिल सहित सूक्ष्म जलपान भी उपलब्ध करवाया गया।

इस आयोजन की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथक के विशेषज्ञा, कवयित्री और अल्पिका फाउंडेशन की अध्यक्षा उमा त्रिगुणायत थी। उन्होंने कहा कि रंगोली उकेरना केवल कला ही नहीं इसका धार्मिक आधार भी है। लोक कला के अंतर्गत आने वाली यह परंपरिक कला अपने परिवर्तनशील स्वरूप के कारण आज भी देश-विदेश में खासी लोकप्रिय है। यह लोगों के स्वागत से लेकर धार्मिक पर्वों तक में उकेरी जाती है। वर्तमान दौर में लोक कला संग्रहालय ने जिस खबसूरती के साथ रंगोली को मिशन शक्ति से जोड़ा है यह अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने इस मौके पर कुछ बंदीशे भी सुनायी।

इस अवसर पर प्रभारी संग्रहालयाध्यक्ष डॉ.मीनाक्षी खेमका ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भी उपहार स्वरूप भेंट किया। इसमें स्थानीय उ.प्र.संग्रहालय निदेशालय, राज्य संग्रहालय और लोक कला संग्रहालय के कर्मचारी और अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्य रूप से माधुरी कीर्ति, छाया यादव, सीमा श्रीवास्तव, विद्यावती, मदनलाल, जितेंद्र कुमार, अजय ने प्रतिभागियों को उत्साहवर्धन किया।

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