वैदिक का फिल्म रिव्यू: ‘पद्मावती देखकर खुश हो जाएंगे राजपूत’
पद्मावती मुझे काफी अच्छी फिल्म लगी. पहली बात तो इसमें हमारी संस्कृति का परिचय मिलता है. दूसरी, सुंदर वेशभूषा, आभूषण, सजावट, युद्ध के प्रचंड दृश्य दिखाई देते हैं. ये ऐसी फिल्म है कि ढाई-तीन घंटे तक ध्यान भटकता नहीं है, टिका रहता है. फिल्म की कहानी बांधे रखती है. ऐसा लगता है कि फिल्म देखते रहें और इसमें डूबे रहें.
हालांकि ये फिल्म शुरू से ही विवादों के घेरे में रही है. लेकिन फिल्म देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. एक भी ऐसा दृश्य नहीं कि विवाद किया जाए. कुछ समय पहले पद्मावती और खिलजी के बीच किसी ड्रीम सीक्वेंस की बात कही गई और प्रेम प्रसंग के दृश्यों की अफवाह उड़ने के बाद बवाल शुरू हुआ था लेकिन जहां तक मेरा मानना है, फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है.
रानी पद्मावती को लेकर करणी सेना और राजपूत संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं.
मैं दावे से कह सकता हूं कि जब राजपूत संगठन इस फिल्म को देखेंगे तो वो खुशी से गदगद हो जाएंगे. यहां तक कि फिल्म देखने के बाद राजपूत संगठन और विरोध कर रही करणी सेना के लोग इस फिल्म के निर्माता-निर्देशकों और किरदार निभा रहे अभिनेता-अभिनेत्री को बधाई देंगे. इसमें राजपूतों का गौरव दिखाया गया है. राजा रतन सिंह को बहादुर, साहसी और उदार राजा दिखाया गया है.
फिल्म में खिलजी का किरदार बेहद ही वीभत्स दिखाया गया है. खिलजी को ठग, हत्यारा और धूर्त दिखाया गया है.
जबकि खिलजी का किरदार इतना वीभत्स दिखाया है कि देखकर घृणा हो जाए. उसे आक्रामक, स्वार्थी, धूर्त ठग, हत्यारा, जाहिल किस्म का दिखाया गया है. वो अपने चाचा की हत्या करता है, चचेरी बहन से शादी करता है, जिसे गुरु मानता है उसे ही मार देता है. खिलजी के ऐसे चित्रण के बाद राजा और रानी का किरदार इसमें और भी ऊंचा हो गया है.
पद्मावती और राजा रतन सिंह के किरदार में दीपिका और शाहिद
जहां तक बात पद्मावती की है तो वो इस फिल्म में देवी की तरह स्थापित होती हैं. मलिक मोहम्मद जायसी के पद्मावत और इतिहास के विभिन्न लेखों में पढ़ा था कि पद्मावती अप्रतिम सुंदरी थीं, लेकिन इस फिल्म से पता चलता है कि वो महान रणनीतिकार भी थीं. वो एक वीर-बहादुर महिला थीं. इस फिल्म में दिखाया गया है कि वो अपने 700 सैनिकों को लेकर खिलजी के पास जाती हैं और बंदी राजा रतन सिंह को छुड़ा लाती हैं.
पद्मावती फिल्म में रानी पद्मावती की छवि और खिलजी के साथ दृश्यों की अफवाह पर बवाल पैदा हुआ.
पूरी फिल्म में पद्मावती का सामना खिलजी से सिर्फ एक बार ही होता है. वहीं एक बार वो राजा रतन सिंह की मांग पर अतिथि बनकर आए खिलजी को दर्पण में मुख दिखाती हैं, वो भी कुछ ही सेकेंड का दृश्य है. इस मूवी में कुछ भी अश्लील या फूहड़ नहीं है. यहां तक कि घूमर नृत्य दिखाते वक्त भी ध्यान रखा गया है कि महल में सिर्फ महिलाएं ही हों.
ये फिल्म राजपूतों की शान की तरह है. इसका अंदाजा लोगों को तभी होगा, जब वो इसे देखेंगे.
(वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार हैं, इन्होंने हाल ही में एक निजी स्क्रीनिंग के दौरान पद्मावती फिल्म देखी है. Hindi.News18.com फिल्म पर वैदिक के विचारों को आप तक पहुंचा रहा है. )
(प्रिया गौतम से बातचीत पर आधारित)
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